1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 08, 2026, 5:16:22 PM
प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google
Sawan Grahan 2026: भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत, पूजा-पाठ और जलाभिषेक कर भोलेनाथ की आराधना करते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन माह 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। पूरे महीने शिव मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भक्तों की भीड़ उमड़ेगी और चारों ओर "हर-हर महादेव" तथा "बम-बम भोले" के जयकारे गूंजेंगे।
सावन में लगेंगे दो ग्रहण
इस बार सावन माह में एक विशेष खगोलीय संयोग बनने जा रहा है। सावन के दौरान सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों पड़ेंगे। ज्योतिष और धर्मशास्त्र में ग्रहण को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे अक्सर बड़े बदलावों का संकेत माना जाता है।
12 अगस्त को लगेगा सूर्य ग्रहण
वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को अमावस्या तिथि पर लगेगा। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण रात 8:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त को रात 1:07 बजे समाप्त होगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी कारण इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा और धार्मिक गतिविधियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा।
28 अगस्त को होगा चंद्र ग्रहण
सूर्य ग्रहण के 15 दिन बाद सावन पूर्णिमा के दिन 28 अगस्त को वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 8:04 बजे शुरू होकर 11:22 बजे समाप्त होगा। यह चंद्र ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी देश में प्रभावी नहीं माना जाएगा।
ज्योतिषीय दृष्टि से क्यों खास है यह संयोग?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 15 दिनों के भीतर सूर्य और चंद्र ग्रहण का पड़ना सामान्य घटना नहीं मानी जाती। धार्मिक मान्यताओं में इसे बड़े सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और प्राकृतिक बदलावों का संकेत माना जाता है।
मान्यता है कि कम समय में राहु और केतु द्वारा सूर्य और चंद्रमा दोनों को ग्रसित करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। कुछ ज्योतिषीय मतों के अनुसार, ऐसे संयोग महंगाई, आर्थिक अस्थिरता, प्राकृतिक आपदाओं या वैश्विक तनाव जैसी परिस्थितियों की ओर संकेत कर सकते हैं।
भारत में नहीं दिखेंगे दोनों ग्रहण
हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं के बावजूद राहत की बात यह है कि अगस्त 2026 में पड़ने वाले दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। इसलिए न तो उनका सूतक काल यहां प्रभावी होगा और न ही धार्मिक कार्यों पर कोई विशेष प्रतिबंध लागू होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रहणों को लेकर लोगों को अनावश्यक भय या भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए। धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए सावन माह में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए।