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दोरंगी नीति : 'मांझी' की नजर में अवैध रिवाल्वर रखने वाला भरत तिवारी आदतन अपराधी, उठे गंभीर सवाल- केंद्रीय मंत्री का सबसे खास 'सलाहकार' पर संगीन केसों की लंबी फेहरिस्त....क्या वो साधु हैं ?

भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच शुरू हो गई है। इस बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भरत तिवारी को आदतन अपराधी बताया है। वहीं उनके सलाहकार पर दर्ज गंभीर मामलों को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 25, 2026, 3:34:18 PM

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Bihar News:  भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच शुरू हो गई है. पुलिस के समक्ष हथियार डालते वीडियो सामने आने के बाद सरकार की भारी किरकिरी हुई थी. इसके बाद न्यायिक जांच के आदेश हुए, आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है. इधर, भरत तिवारी को लेकर राजनीति जारी है. कुछ लोग सामाजिक कार्यकर्ता तो कई आदतन अपराधी बता रहे. मोदी कैबिनेट में मंत्री जीतनराम मांझी भरत तिवारी को आदतन अपराधी साबित करने में जुटे हैं. हालांकि पूर्व सीएम मांझी भूल जाते हैं कि वे जिसे अपने करीब बिठाए हुए हैं, सलाहकार बनाकर रखे हैं, वो कई गंभीर केस के आरोपी हैं. सवाल उठ रहा है कि जिन पर संगीन आरोप हों,गंभीर धाराओं में बिहार से लेकर दूसरे राज्य में मुकदमा दर्ज हो, वो सामान्य लोग कैसे हो सकता है..? क्या वो आदतन अपराधी नहीं ? ये तमाम सवाल पूछे जाने लगे हैं. 

भरत तिवारी अच्छे थे तो रिवाल्वर कहां से आया, एससी-एसटी एक्ट का केस कैसे हुआ ? 

जीतनराम मांझी ने एक बार फिर से भरत तिवारी पर अपनी भड़ास निकाली है. उन्होंने कहा कि अगर वह विक्षिप्त थे तो उनके पास रिवाल्वर कहां से आया? बहुत अच्छा थे तो ढ़ाई लाख का रिवाल्वर नाजायज तरीके से कैसे रखे हुए थे? अगर बहुत अच्छा थे तब एससी-एसटी एक्ट का केस उन पर कैसे था? 

भरत तिवारी आदतन अपराधी- मांझी 

उन्होंने (मांझी) कहा कि कहने का मतलब है कि वह आदतन अपराधी थे. उस दिन भी ऐसा लगा कि वह पुलिस को मार देगा. इसलिए पुलिस ने एनकाउंटर किया. पुलिस ने कोई गलत नहीं किया. पुलिस का एक्शन वहां पर ठीक है. उन्होंने कहा कि ''भय बीन होय न प्रीत.'' जब तक भय नहीं होगा, तब तक लॉ एंड ऑर्डर ठीक नहीं हो सकता है.  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जो एक्शन लिया है, हाफ एनकाउंटर का या फूल एनकाउंटर का , बहुत अच्छा निर्णय लिया है. इसकी प्रशंसा की जानी चाहिए.

मांझी के सलाहकार पर गंभीर धाराओं में कई केस ...जेल यात्रा भी कर चुके हैं

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान के विवाद शुरू हो गया है. लोग पूछ रहे कि आप जिसे अपना सलाहकार बनाकर बिठाये हैं, वो क्या हैं. उन पर तो हत्या का प्रयास, मारपीट,रेप की कोशिश, पुलिस के हथियार से हर्ष फायरिंग से लेकर कई केस न सिर्फ बिहार बल्कि झारखंड में भी दर्ज है. आपके सलाहकार हत्या के प्रयास मामले में जेल यात्रा कर चुके हैं. क्या इतने गंभीर मामलों के आरोपी आदतन नहीं हैं..जिन एक नहीं अनेकों केस पटना से लेकर भोजपुर व झारखंड राज्य के थानों में दर्ज है ? सवाल पूछा जा रहा कि अगर भरत तिवारी हथियार रखने और एससी-एसटी का केस दर्ज होने से अपराधी हो सकता है, तब आपके सलाहकार कैसे साधु हो सकते हैं. हाल ही में मांझी के सलाहकार का हर्ष फायरिंग करते वीडियो सामने आया, इशके बाद भोजपुर में मुकदमा दर्ज किया गया था. 

तमाम गंभीर केसों की बात छोड़ दीजिए, वर्ष 2026 में भी जीतनराम मांझी के सलाहकार पर भोजपुर के नगर थाने में पुलिस के बयान पर केस दर्ज हुआ था. इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर कथित हर्ष फायरिंग का वीडियो प्रसारित होने के बाद जीतन राम मांझी के सलाहकार दानिश रिजवान के खिलाफ मार्च 2026 में आरा के टाउन थाना में प्राथमिकी की गई. यह प्राथमिकी दारोगा नुमान अली शौकत के बयान पर की गई थी. प्राथमिकी के अनुसार 26 मार्च को एक वीडियो प्राप्त हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति को फायरिंग करते देखा गया। मामले की जांच दारोगा से कराई गई, जिसमें फायरिंग करने वाले की पहचान दानिश रिजवान के रूप में हुई।  पुलिस ने कहा कि हर्ष फायरिंग संज्ञेय अपराध है, इसलिए प्राथमिकी दर्ज की गई है। इससे पहले टाउन थाना पुलिस ने इस मामले में सनहा दर्ज कर जांच शुरू की थी।

वहीं, दानिश रिजवान ने वीडियो को पुराना एवं एआई जनरेटेड बताते हुए आरोपों से इंकार किया था.  उनका कहना है कि इस तरह की घटना को लेकर वर्ष 2017 में भी कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें उनके हथियार का लाइसेंस रद कर दिया गया था।