Hindi News / politics / बांकीपुर उपचुनाव पर सियासी घमासान तेज, पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर को बताया...

बांकीपुर उपचुनाव पर सियासी घमासान तेज, पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर को बताया ‘हवा-हवाई नेता’; दे दी यह बड़ी सलाह

Bihar Politics: बांकीपुर उपचुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर को ‘हवा-हवाई नेता’ बताते हुए कहा कि वे केवल पैसे और प्रचार के दम पर राजनीति कर रहे हैं, जबकि जनता जमीनी नेताओं को चुनती है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jul 06, 2026, 3:37:10 PM

Bihar Politics

- फ़ोटो Reporter

Bihar Politics: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जन सुराज से प्रशांत किशोर के नाम की घोषणा के बाद बयानबाजी और तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर पर तीखा हमला बोला है।


पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर को “हवा-हवाई नेता” बताते हुए कहा कि बिहार की जनता समझदार है और ऐसे नेताओं को मौका नहीं देगी। उन्होंने कहा कि पीके ने न तो चुनाव से पहले और न ही बाद में किसी भी विपक्षी दल से बातचीत की, फिर भी वे जीत का सपना देख रहे हैं।


उन्होंने कहा कि जनता पहले से ही मौजूदा सरकार से नाराज है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी नेता केवल प्रचार और पैसे के दम पर चुनाव जीत लेगा। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर एसी टेंट, सोशल मीडिया और धनबल के सहारे राजनीति करना चाहते हैं, जबकि उनका जमीनी संघर्ष या योगदान बिहार में नहीं दिखता।


पप्पू यादव ने कहा कि यदि सभी विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव लड़ें तो भाजपा को हराया जा सकता है, लेकिन प्रशांत किशोर ने किसी भी विपक्षी दल—राजद या कांग्रेस—से संपर्क नहीं किया है और न ही किसी को भरोसे में लिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार के संघर्ष में उनका क्या योगदान है और जनता उन्हें किस आधार पर प्रतिनिधि चुनेगी।


उन्होंने कहा कि बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की परंपरागत सीट मानी जाती है। ऐसे में भाजपा ने अभी तक अपना उम्मीदवार तय नहीं किया है, जबकि प्रशांत किशोर सीधे चुनाव मैदान में उतर गए हैं। 


पप्पू यादव ने कहा कि हाल के वर्षों में बिहार में कई बड़ी घटनाएं हुईं, लेकिन उस दौरान प्रशांत किशोर कहीं नजर नहीं आए। उन्होंने आरोप लगाया कि वे केवल राजनीतिक अवसर देखकर सक्रिय होते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी चुनाव लड़ सकता है, लेकिन जीतने के लिए जनता के दिलों में जगह बनानी पड़ती है।