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हाईवे यात्रियों को बड़ी राहत! अब 60 KM से पहले नहीं लगेंगे नए टोल, सरकार ने जारी किए सख्त नियम

देशभर में हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब नए राष्ट्रीय राजमार्गों पर 60 किलोमीटर से कम दूरी पर टोल प्लाजा बनाने पर सख्ती की जाएगी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 28, 2026, 2:05:49 PM

हाईवे यात्रियों को बड़ी राहत! अब 60 KM से पहले नहीं लगेंगे नए टोल, सरकार ने जारी किए सख्त नियम

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New Toll Policy : देशभर में हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब नए राष्ट्रीय राजमार्गों पर 60 किलोमीटर से कम दूरी पर टोल प्लाजा बनाने पर सख्ती की जाएगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी कर दी है, जिसके तहत नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।


सरकार के इस कदम का उद्देश्य यात्रियों को कम दूरी में बार-बार टोल टैक्स देने की परेशानी से राहत दिलाना है। वर्तमान में देश के कई हिस्सों में ऐसी स्थिति है, जहां 60 किलोमीटर की दूरी पूरी होने से पहले ही दो बार टोल शुल्क देना पड़ता है। इससे लंबे समय से वाहन चालकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी हुई थी।


मंत्रालय के अनुसार, देशभर में करीब 130 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है जहां टोल प्लाजा निर्धारित दूरी से कम अंतराल पर स्थित हैं। इनमें लगभग 22 टोल प्लाजा ऐसे हैं जिनके बीच की दूरी 30 किलोमीटर से भी कम है। इस व्यवस्था को सुधारने के लिए 24 जून को नई एसओपी लागू की गई है।


नए नियमों के तहत यदि कोई निर्माण एजेंसी या ठेकेदार 60 किलोमीटर से कम दूरी पर टोल प्लाजा स्थापित करना चाहता है या किसी शहर की सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर टोल बनाना चाहता है, तो उसे पहले विशेष अनुमति लेनी होगी। यह अनुमति सड़क निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही प्राप्त करनी होगी।


इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के सदस्य (कमर्शियल ऑपरेशन) की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टोल समिति का गठन किया गया है। इस समिति में सड़क परिवहन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, संयुक्त सचिव (टोल), एनएचआईडीसीएल के प्रबंध निदेशक समेत कई शीर्ष अधिकारी शामिल किए गए हैं।


सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की छूट देने से पहले परियोजना एजेंसियों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा। साथ ही, यह भी अनिवार्य किया गया है कि हाईवे परियोजना का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा होने तक टोल अधिसूचना जारी कर दी जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से हाईवे परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और यात्रियों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।


दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर स्थित गाजियाबाद के छिजारसी टोल प्लाजा को लेकर भी लंबे समय से विवाद बना हुआ है। स्थानीय लोग लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि एंट्री और एग्जिट प्वाइंट के बेहद करीब टोल वसूली की जा रही है। इसी प्रकार पंजाब और हरियाणा को जोड़ने वाले अंबाला-चंडीगढ़ मार्ग पर भी कम दूरी में कई टोल प्लाजा मौजूद हैं। सरकार को समय-समय पर ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं, जिसके बाद इस दिशा में सख्त कदम उठाए गए हैं।


उधर, राजधानी दिल्ली में भी टोल नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने टोल नाकों पर नियम तोड़ने वालों को ई-नोटिस भेजने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। अब इस प्रस्ताव को दिल्ली सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।अधिकारियों का कहना है कि मंजूरी मिलने के बाद टोल नियमों के उल्लंघन पर डिजिटल माध्यम से नोटिस जारी किए जाएंगे, जिससे निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो सकेगी।