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Bihar News : बिहार में गजब प्रमोशन का मामला! 4 महीने पहले बने सीनियर डॉक्टर, नए नोटिफिकेशन में फिर हो गए जूनियर

भागलपुर JLNMCH में डॉ. अजय प्रताप के प्रमोशन को लेकर सवाल उठे हैं। सीनियर पद से सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी तक पहुंचा मामला चर्चा में।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 27, 2026, 6:34:15 AM

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Bihar News : बिहार के भागलपुर स्थित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) में एक डॉक्टर की पदोन्नति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अजय प्रताप से जुड़ा है, जहां चार महीने के अंदर ही उनके पद को लेकर अलग-अलग स्थिति सामने आई है। एक ओर उन्हें वरीय चिकित्सा पदाधिकारी बताते हुए जिम्मेदारी दी गई, वहीं बाद में जारी सरकारी अधिसूचना में उनका नाम सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में सामने आया।


मामले के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर यह प्रशासनिक गलती है या किसी भ्रम के कारण ऐसा हुआ। अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


चार महीने में बदल गया पद

जानकारी के अनुसार, अस्पताल अधीक्षक कार्यालय की ओर से डॉ. अजय प्रताप को वरीय चिकित्सा पदाधिकारी बताते हुए ब्लड बैंक का प्रभारी नियुक्त किया गया था। इसके लिए सरकार की अधिसूचना का हवाला दिया गया था।


लेकिन बाद में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी एक अन्य अधिसूचना में डॉ. अजय प्रताप का नाम सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में दर्ज मिला। इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या एक ही नाम वाले दो अलग-अलग डॉक्टरों के बीच भ्रम हुआ या फिर किसी स्तर पर दस्तावेजों की जांच में चूक हुई।


पंजीयन संख्या में भी अंतर

मामले में सबसे बड़ा सवाल डॉक्टरों की पहचान को लेकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि अलग-अलग दस्तावेजों में डॉ. अजय प्रताप नाम के डॉक्टरों की पंजीयन संख्या अलग-अलग है।


एक सूची में जिस डॉक्टर को वरीय चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर दिखाया गया है, उनकी पंजीयन संख्या अलग बताई गई है, जबकि दूसरी अधिसूचना में सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में दर्ज डॉक्टर की पंजीयन संख्या अलग है। इसी अंतर के कारण पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


डॉ. अजय प्रताप ने दी सफाई

डॉ. अजय प्रताप ने मामले में अपनी सफाई देते हुए कहा कि उन्हें पदोन्नति संबंधी जानकारी कार्यालय से मिले पत्र के आधार पर हुई थी। उन्होंने बताया कि बाद में जब उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी मिली तो उन्होंने मुख्यालय और अस्पताल अधीक्षक को आवेदन देकर सुधार का आग्रह किया है।


उन्होंने कहा कि उनका सरकारी नोटिफिकेशन सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में हुआ है और वह उसी के अनुसार कार्य करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्लड बैंक से जुड़े कार्यों के लिए उनके पास आवश्यक योग्यता और अनुभव मौजूद है।


जांच के बाद होगी स्थिति साफ

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अगर इस मामले में शिकायत प्राप्त होती है तो नियमानुसार जांच कराई जाएगी। जांच में अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।


फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन के बीच जांच का विषय बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक ही नाम के डॉक्टरों की पहचान में अंतर होने के बावजूद पदोन्नति का आदेश कैसे जारी हुआ और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।


भागलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामने आया यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।