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बेनकाब हुई मोतिहारी पुलिस ! टोल प्लाजा से पकड़ाया 25 लाख.., दूसरे थाने में 35 लाख की हुई डील, मामला पहुंचा DGP के पास तो मचा हड़कंप...मांगी गई रिपोर्ट

मोतिहारी के तुरकौलिया थाना की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे हैं। 25 लाख रुपये की बरामदगी के बाद आरोपियों की रिहाई के लिए 35 लाख रुपये की कथित वसूली की शिकायत डीजीपी तक पहुंची है। मामले की जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजी जा चुकी है।

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Jun 25, 2026, 4:25:25 PM

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AI से सांकेतिक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar Police: बिहार पुलिस बड़ा-बड़ा खेल करती है. मोतिहारी में एक ऐसे ही खेल का खुलासा हुआ है. खुलासे के बाद थानेदार से लेकर ऊपर के अधिकारियों पर शक की सूई घूमने लगी है. पीड़ित ने वसूली के इस खेल को डीजीपी तक पहुंचा दिया. इसके बाद महकमे में हड़कंप मच गया है. मामले को रफा-दफा करने की कोशिश शुरू हुई..बताया जाता है कि वसूली गई मोटी रकम वापस कराई गई है. इधर पुलिस अधीक्षक ने अपनी जांच रिपोर्ट भेज दी है. अब कार्रवाई का इंतजार है. मामला एक माह पहले की है. हालांकि अब यह मामला सावर्जनिक हो रहा है. 

पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के तुरकौलिया थानेदार संपत कुमार ने 28 मई 2026 को अपने स्व लिखित बयान के आधार पर केस संख्या 281/ 26 दर्ज किया . जिसमें कहा गया कि 26 मई की रात 12:50 बजे मुझे सूचना मिली कि उजले रंग की कार से अवैध कारोबारी पटना की ओर से आ रहे हैं. वे अपने साथ भारी मात्रा में नगद राशि लेकर चल रहे हैं, जो संभवत अवैध धंधों से अर्जित की गई है. सूचना की गंभीरता को देखते हुए मैंने तत्काल वरीय अधिकारी को इस संबंध में सूचना दिया . फिर पुलिस बल के साथ रवाना हुआ . तुरकौलिया थाना क्षेत्र के निमोइया चौक पर सघन वाहन जांच प्रारंभ की गई. इसी क्रम में रात करीब 1:10 बजे मोतिहारी की ओर से एक उजले रंग की संदिग्ध कर आती हुई दिखाई दी, जिसे रोका गया. गाड़ी में सवार व्यक्ति से पूछताछ की गई. उन्होंने अपना नाम कृष्णा सहनी आदापुर, सुभाष कुमार नकरदेई दोनों पूर्वी चंपारण के रहने वाला था. वहीं दीपेश कुमार यादव और प्रज्वल सोनी दोनों जिला- बारा नेपाल के रहने वाले थे. विधि सम्मत तरीके से उजले रंग की i10 कार की तलाशी ली गई. इस दौरान डिक्की के तहखाना में छुपा कर रखी गई 24 लाख 91300 की नगद बरामद की गई। बरामद राशि के संबंध में सवार व्यक्ति से पूछताछ की गई, लेकिन उनके द्वारा कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया. ऐसे में मुझे विश्वास है कि यह राशि अवैध धंधों से कपट पूर्ण, बेईमानी एवं अपराधिक दुरुपयोग से अर्जित की गई है. इसे किसी आपराधिक गतिविधि में लगाई जा सकती है. ऐसे में गाड़ी को जप्त करते हुए और इन व्यक्तियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 317 (2) 317 (5) 318 (4) और 61 (2) के तहत प्राथमिक की दर्ज की जा रही है.  तुरकौलिया थानेदार ने 26 तारीख को ही इस संबंध में मोतिहारी सदर-1 के एसडीपीओ से कार्रवाई का आदेश देने को लेकर पत्र लिखा था. 

ऊपर की सारी बातें, तुरकौलिया थानेदार ने अपने बयान में लिखा है. दरअसल, खेल इतना भर ही नहीं है. इन सभी को तुरकौलिया थाना क्षेत्र में नहीं बल्कि राष्ट्रीयराज मार्ग पर चकिया टोल प्लाजा के पास पकड़ा गया था. इन सभी को चकिया थानाध्यक्ष ने पकड़ा और तुरकौलिया पुलिस के हवाले कर दिया. खुद चकिया थानेदार इस बात को स्वीकार करते हैं कि 26 मई की रात हमें सूचना दी गई.इस आधार पर हमने उक्त गाड़ी को पकड़ा,लेकिन हमें खास सबूत नहीं मिला. इसके बाद तुरकौलिया थाना की पुलिस ने उस कार और उसमें सवार सभी को अपने कब्जे में ले लिया. 

तुरकौलिया पुलिस ने 26 मई को जब्त कर सभी चार लोगों को गिरफ्तार किया,पर केस 28 मई को दर्ज की गई। केस दर्ज करने के बाद चारो आरोपियों को थाने से ही बेल दे दिया गया. दरअसल इसके पीछे बड़ी सेटिंग की गई. कहा जा रहा है कि केस को मैनेज करने के लिए 26 तारीख से लेकर 28 तारीख तक शह-मात का खेल चला. बताया जाता है कि मोटी रकम की वसूली की गई. विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इन सभी का 25 लाख रू तो जब्त हुआ ही, रिहाई के लिए 35 लाख रू पुलिस अधिकारियों ने वसूल किया है. निचले अधिकारियों ने वरीय के नाम पर 25 लाख व अपने लिए 10 लाख रू लिए, तब जाकर सभी को थाने से बेल दिया गया. 

दरअसल, मामले का खुलासा तब हुआ,तब लुट चुके शख्स का भाई डीजीपी के पास शिकायत लेकर पहुंच गया. डीजीपी को पूरी बात बताई गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि मोतिहारी के उगम पांडेय कॉलेज के पीछे डीएसपी का दलाल इरफान अंसारी व एक अन्य ने 35 लाख रू रिश्वत की रकम ली. अगर टावर लोकेशन की पड़ताल कराई जाय तो पुलिसकर्मियों की पोल खुल जायेगी. शिकायत के बाद डीजीपी ने इस मामले को लेकर मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी थी. बताया जाता है कि एसपी मोतिहारी ने अपनी जांच रिपोर्ट भेज दी है.