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LPG पर आया बड़ा अपडेट, अब इन उपभोक्ताओं की रसोई गैस सब्सिडी होगी बंद; जानिए.. नया नियम

LPG Subsidy: केंद्र सरकार ने 10 लाख से अधिक सालाना आय वाले उपभोक्ताओं की LPG गैस सब्सिडी बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। तेल कंपनियां इनकम टैक्स डेटा के जरिए पात्र और अपात्र उपभोक्ताओं की पहचान कर रही हैं।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated May 12, 2026, 12:26:37 PM

LPG Subsidy

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

LPG Subsidy: बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों और सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ के बीच केंद्र सरकार ने रसोई गैस (LPG) सब्सिडी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) इनकम टैक्स विभाग के डेटा के आधार पर ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान कर रही हैं, जो सब्सिडी पाने के पात्र नहीं हैं।


रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार उन उपभोक्ताओं की LPG सब्सिडी बंद करने की तैयारी में है जिनकी सालाना आय 10 लाख या उससे अधिक है। सरकार का मानना है कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों को सब्सिडी देने के बजाय इस राशि का उपयोग गरीबों की सहायता और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में किया जाना चाहिए।


तेल कंपनियों ने ऐसे उपभोक्ताओं को मैसेज भेजना शुरू कर दिया है, जिनके टैक्स रिकॉर्ड के अनुसार उनकी या उनके परिवार के किसी सदस्य की ग्रॉस टैक्सेबल इनकम तय सीमा से ज्यादा है। मैसेज में साफ कहा गया है कि यदि ग्राहक को लगता है कि यह जानकारी गलत है, तो वह 7 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करा सकता है। ऐसा नहीं करने पर उसकी गैस सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी।


उपभोक्ता कंपनियों की टोल-फ्री हेल्पलाइन या आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सरकार और तेल कंपनियों का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और सरकारी खर्च पर दबाव बढ़ा है।


बताया जा रहा है कि सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और सब्सिडी खर्च कम करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। इसी क्रम में नए गैस कनेक्शन जारी करने की रफ्तार धीमी की गई है और गैस सिलेंडर की री-बुकिंग के बीच का समय भी बढ़ाया गया है ताकि खपत को नियंत्रित किया जा सके।


सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और RBI अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर कई बैठकें हो चुकी हैं। सरकार ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के साथ-साथ सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी सामानों के आयात को सीमित करने पर भी विचार कर रही है, ताकि डॉलर की बचत की जा सके।