1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 16, 2026, 7:06:19 AM
प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google
Fuel Export Tax: केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी कर दी है। राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर की दर से शुल्क लगाया जाएगा। संशोधित दरें मंगलवार से लागू हो गई हैं।
हालांकि, पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क की दरें भी पहले की तरह बरकरार रखी गई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का आम उपभोक्ताओं पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। इससे पहले 27 मार्च से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) लागू किया गया था।
सरकार इन शुल्क दरों की हर 15 दिन में समीक्षा करती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों के आधार पर इनमें बदलाव किया जाता है। इससे पहले एक जून को भी शुल्क दरों में संशोधन किया गया था।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। मंत्रालय ने नागरिकों और उद्योग जगत से ऊर्जा का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की अपील की है। प्रेस वार्ता में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता अपनी जरूरत का डीजल निर्धारित उपभोक्ता पंपों से ही खरीदें, ताकि रिटेल पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक दबाव न बढ़े।
सुजाता शर्मा के अनुसार, वर्तमान स्थिति किसी ईंधन संकट का परिणाम नहीं है, बल्कि खपत के पैटर्न में आए बदलाव का असर है। मई महीने में लगभग 42 करोड़ लीटर डीजल, जो पहले बल्क या उपभोक्ता पंपों के जरिए वितरित होता था, अचानक रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से बिकने लगा। इसके कारण कुछ क्षेत्रों में सप्लाई संबंधी चुनौतियां सामने आईं।
आम उपभोक्ताओं को असुविधा से बचाने के लिए 11 जून को जारी बजट अधिसूचना के तहत रिटेल स्तर पर डीजल की बिक्री 200 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तक सीमित कर दी गई है। वहीं औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपने निर्धारित पंपों से ही ईंधन लेने के निर्देश दिए गए हैं।
सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था लगभग 90 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर लागू की गई है। उन्होंने दोहराया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है तथा सभी उपभोक्ताओं को ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।