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जीतन राम मांझी का नया राग: SC-ST के लिए अलग निर्वाचक मंडल की वकालत की, बोले- ऊंची जाति वाले लोग..

Bihar Politics: पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने SC-ST के लिए अलग निर्वाचक मंडल की मांग उठाते हुए कहा कि यदि डॉ. भीमराव आंबेडकर का प्रस्ताव लागू हुआ होता तो दलितों की स्थिति आज बेहतर होती। उन्होंने आरक्षण और पूना समझौते पर भी अपनी राय रखी।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jul 07, 2026, 7:22:27 AM

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जीतन राम मांझी का नया राग - फ़ोटो Reporter

Bihar Politics: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए अलग निर्वाचक मंडल (Separate Electorate) की वकालत की है। उन्होंने कहा कि यदि 1932 के पूना समझौते के समय डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया होता, तो आज दलित समाज की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति कहीं बेहतर होती।


पटना में सोमवार को पार्टी की राज्य परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए मांझी ने कहा कि आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अनुसूचित जातियों में साक्षरता दर महज 32 प्रतिशत है और उनकी सामाजिक स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है।


'अलग निर्वाचक मंडल होता तो तस्वीर अलग होती'

मांझी ने कहा कि यदि SC-ST के लिए अलग निर्वाचक मंडल की व्यवस्था होती, जहां केवल इन समुदायों के मतदाता ही अपने प्रतिनिधि चुनते, तो आज हालात पूरी तरह अलग होते। उनका आरोप था कि वर्तमान व्यवस्था में आरक्षित सीटों पर सभी वर्गों के मतदान के कारण प्रभावशाली जातियों का निर्वाचित प्रतिनिधियों पर प्रभाव बना रहता है। उन्होंने कहा, "आरक्षित सीटों पर हमारे लोग वोट तो देते हैं, लेकिन आजीविका के लिए आज भी खेतों में मजदूरी करने को मजबूर हैं, जबकि लाभ दूसरे लोग उठा लेते हैं।"


पूना समझौते का किया जिक्र

मांझी ने कहा कि महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के बीच SC-ST के लिए अलग निर्वाचक मंडल को लेकर वैचारिक मतभेद था, जिसका अंत पूना समझौते के रूप में हुआ। उनके अनुसार, इस समझौते के तहत अलग निर्वाचक मंडल की जगह आरक्षित सीटों पर सभी मतदाताओं को मतदान का अधिकार देने की व्यवस्था स्वीकार की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय के बड़े नेताओं के दबाव में डॉ. आंबेडकर को अपनी मांग से पीछे हटना पड़ा। मांझी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने अपनी आत्मकथा में समझौते पर हस्ताक्षर करते समय अपनी पीड़ा का उल्लेख किया था।


आरक्षण पर भी दिया बयान

मांझी ने बिना किसी का नाम लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के एक दलित नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग बिना पर्याप्त काम किए खुद को "आरक्षण का सबसे बड़ा रक्षक" बताने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, "कुछ लोग कहते हैं कि जब तक वे जीवित हैं, आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता। केवल नाखून काटकर शहीद बनने की कोशिश की जा रही है। मेरा मानना है कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं, तब तक कोई भी आरक्षण से छेड़छाड़ नहीं कर सकता।"


पुत्र संतोष सुमन को भी दी राजनीतिक सलाह

बैठक के दौरान मांझी ने बिहार सरकार में मंत्री और अपने पुत्र संतोष कुमार सुमन को भी सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "संतोष, तुम्हें भी बोलना चाहिए। चुप रहने से कुछ नहीं मिलेगा। जो दिखता है, वही बिकता है। सार्वजनिक जीवन में मुखर रहने वाले लोग राजनीतिक लाभ हासिल कर लेते हैं।" गौरतलब है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान अपनी चुनावी सभाओं में अक्सर कहते रहे हैं कि उनके रहते आरक्षण को कोई समाप्त नहीं कर सकता।