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पटना में प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे के लिए अब AI का इस्तेमाल, बिजली उपभोक्ताओं से फोन पर संपर्क करेगा नगर निगम

Patna Property Tax: पटना नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स असेसमेंट के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल करेगा। बिजली उपभोक्ताओं के डेटा के आधार पर संपत्तियों का सर्वे कर टैक्स बेस बढ़ाने और नई होल्डिंग्स को रजिस्टर करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jul 07, 2026, 9:24:41 AM

Patna Property Tax

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Patna Property Tax: पटना नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रॉपर्टी टैक्स के सेल्फ असेसमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब निगम बिजली बिल के आधार पर संपत्तियों का सर्वे करेगा। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद ली जाएगी, ताकि कम समय में अधिक से अधिक संपत्ति मालिकों से संपर्क किया जा सके।


पटना नगर निगम क्षेत्र में करीब 7 लाख विद्युत उपभोक्ता हैं, जबकि प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में लगभग 3 लाख संपत्तियां ही पंजीकृत हैं। बिजली उपभोक्ताओं और टैक्स असेसमेंट के बीच मौजूद इस अंतर को कम करने, नई होल्डिंग्स को रजिस्टर करने और निगम के टैक्स बेस को बढ़ाने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान शुरू किया गया है।


अभियान के संचालन के लिए नगर निगम के कंट्रोल रूम में 26 सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई है। यह टीम प्रतिदिन बिजली उपभोक्ताओं से फोन के माध्यम से संपर्क करेगी और उनकी संपत्ति, SAS संख्या और प्रॉपर्टी टैक्स भुगतान से जुड़ी जानकारी जुटाएगी। संपर्क के दौरान उपभोक्ताओं को प्रॉपर्टी टैक्स असेसमेंट की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेजों और अन्य औपचारिकताओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।


नगर निगम इस अभियान में AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल करेगा, जिससे ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक कम समय में पहुंच बनाई जा सके। इससे संपत्तियों की पहचान और टैक्स असेसमेंट प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।


अभियान की निगरानी के लिए टीम के सभी सदस्यों को प्रतिदिन अपने काम की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इससे अभियान की प्रगति और संपर्क किए गए उपभोक्ताओं की जानकारी पर नजर रखी जाएगी। ऊर्जा विभाग ने पटना नगर निगम को कुल 6,97,792 विद्युत उपभोक्ताओं का विवरण उपलब्ध कराया है। 


इनमें से 6,18,244 उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर दर्ज हैं। अभियान के पहले चरण में उन्हीं उपभोक्ताओं से संपर्क किया जा रहा है, जिनके मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं। इसके बाद अन्य उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने की योजना है।