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मुकेश सहनी का दावा: 2029 में राहुल गांधी की सरकार बनी तो निषाद समाज को मिलेगा आरक्षण

VIP प्रमुख Mukesh Sahani ने कहा कि निषाद समाज को आरक्षण दिलाने की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा। पार्टी ने कर्नाटक में विस्तार करते हुए 2028 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 09, 2026, 9:33:08 PM

बिहार न्यूज

2028 में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी - फ़ोटो रिपोर्टर

PATNA: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक एवं बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने आज कहा है कि निषाद समाज के हक और अधिकार की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के लिए पार्टी ने कर्नाटक में अपना विस्तार किया है। 


पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों से वीआईपी निषाद समाज को आरक्षण दिलाने की लड़ाई लड़ रही है और यह लड़ाई तब तक मुकाम तक नहीं पहुंचेगी जब तक दिल्ली की सत्ता में उनकी प्रभावी भागीदारी नहीं होगी।


सहनी ने बताया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बाद अब कर्नाटक में भी पार्टी का संगठन खड़ा किया गया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में 12 से 13 प्रतिशत निषाद समुदाय निवास करता है, जिन्हें वहां गंगापुत्र के नाम से जाना जाता है। पार्टी ने बी.के. मोहन को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है और उनके नेतृत्व में 2028 का विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है।


उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2029 में राहुल गांधी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने पर निषाद समाज की आरक्षण संबंधी मांगों को न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि वीआईपी देश के विभिन्न राज्यों में अपने संगठन का विस्तार कर रही है ताकि सामाजिक न्याय की लड़ाई को और मजबूती मिल सके।


केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए वीआईपी प्रमुख सहनी ने कहा कि देश भारी कर्ज, महंगाई और बेरोजगारी जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रचार और राजनीतिक प्रबंधन में अधिक रुचि ले रही है। उन्होंने कहा कि देश के युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं और जनता बढ़ती आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही है।


बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए सहनी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और जनादेश का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों को तोड़ने और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों को दबाने का प्रयास नहीं होना चाहिए।


राजद अध्यक्ष लालू  यादव की सुरक्षा और सरकारी आवास से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार को जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को परेशान कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है, जबकि इससे बिहार की जनता की समस्याओं का कोई समाधान नहीं होगा।