Hindi News / bihar / patna-news / Bharat Bhushan Tiwari : CBI जांच होगी या नहीं? भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर...

Bharat Bhushan Tiwari : CBI जांच होगी या नहीं? भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस में आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई; सबकी नजर फैसले पर

भरत भूषण तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई। CBI जांच, पुलिस पर FIR और कोर्ट मॉनिटरिंग की मांग ने बढ़ाई हलचल। क्या आज मिलेगा बड़ा आदेश?

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 30, 2026, 9:27:52 AM

Bharat Bhushan Tiwari

Bharat Bhushan Tiwari - फ़ोटो ai photo

Bharat Bhushan Tiwar : बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले ने अब देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा। याचिका में एनकाउंटर की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है। यह जनहित याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी ने दायर की है। उन्होंने स्वयं याचिकाकर्ता के रूप में अदालत में पक्ष रखा है। याचिका में केंद्र सरकार, बिहार सरकार, बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) और CBI को प्रतिवादी बनाया गया है।


CBI जांच की उठाई गई मांग

याचिका में दावा किया गया है कि भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ और इसकी निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि किसी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता का कानून व्यवस्था पर भरोसा बना रहे। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी जाए और जांच की प्रक्रिया अदालत की निगरानी में कराई जाए।


पुलिस अधिकारियों पर FIR दर्ज करने की मांग

याचिका में एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का भी अनुरोध किया गया है। इसमें कहा गया है कि यदि प्रथम दृष्टया किसी पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, तो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू होना आवश्यक है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि कानून के शासन (Rule of Law) को बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस तरह के मामलों में स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है।


विशेषज्ञ समिति से निगरानी की भी अपील

याचिका में केवल CBI जांच की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से जांच की पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी भी प्रकार के पक्षपात की आशंका कम होगी। उनका मानना है कि अदालत की निगरानी में होने वाली जांच से सभी पक्षों को न्याय मिलने की संभावना अधिक होगी।


आज की सुनवाई पर टिकी निगाहें

इस मामले की सुनवाई पर पूरे बिहार समेत देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट आज यह तय कर सकता है कि मामले में आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जाए। अदालत यह भी विचार कर सकती है कि क्या इस मामले में CBI जांच की जरूरत है या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। हालांकि, अभी तक इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई अंतिम टिप्पणी या आदेश जारी नहीं किया गया है। आज की सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत इस जनहित याचिका पर क्या रुख अपनाती है।


भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद इस मामले की कानूनी दिशा तय होने की संभावना है। अदालत के फैसले पर सभी पक्षों की नजरें बनी हुई हैं।