1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 30, 2026, 9:04:21 AM
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बिहार पुलिस ने राज्य के टॉप कुख्यात अपराधियों की सूची में शामिल और पांडव सेना के सरगना संजय सिंह की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। लंबे समय से फरार चल रहे संजय सिंह को विशेष अभियान के तहत गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, 30 जून 2026 को पुलिस उपाधीक्षक अबु सैफी मुर्तजा के नेतृत्व में SOG/STAW-05B की टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे पटना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे बिहटा थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी संजय सिंह, स्वर्गीय रमेश सिंह का पुत्र है और पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत निमा गांव का रहने वाला है। वह बिहार के सबसे वांछित अपराधियों में शामिल था और कई वर्षों से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी में था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, नरसंहार, रंगदारी के लिए हत्या, अवैध खनन, भू-माफिया गतिविधियों सहित कई गंभीर अपराधों के आरोप दर्ज हैं।
पुलिस ने बताया कि संजय सिंह की गिरफ्तारी लंबे समय से चल रहे ऑपरेशन का हिस्सा थी। खुफिया सूचना के आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। जैसे ही उसकी मौजूदगी की जानकारी मिली, विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों तथा सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, संजय सिंह बिहटा थाना कांड संख्या 672/2025 में भी वांछित था। यह मामला AK-47 की बरामदगी से जुड़ा है। इस मामले में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। इसी कारण गिरफ्तारी के बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए बिहटा थाना को सौंप दिया गया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजय सिंह का आपराधिक इतिहास लगभग तीन दशक पुराना है। उसके खिलाफ अब तक 26 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी, अपहरण, लूट, अवैध हथियार रखना, आर्म्स एक्ट, आपराधिक षड्यंत्र, धमकी, मारपीट, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम और बिहार उत्पाद अधिनियम जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।
उसके खिलाफ दर्ज मामलों में पटना जिले के मसौढ़ी, धनरुआ, पुनपुन, बिहटा, कृष्णापुरी और पत्रकार नगर थानों के अलावा जहानाबाद, भागलपुर, हजारीबाग, रांची और झारखंड के अन्य थानों में भी मुकदमे दर्ज हैं। इससे साफ है कि उसका आपराधिक नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि दूसरे राज्यों तक भी फैला हुआ था।
पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, संजय सिंह पर वर्ष 1996 से लेकर वर्ष 2025 तक लगातार गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होते रहे। शुरुआती मामलों में हत्या और आर्म्स एक्ट के मुकदमे शामिल हैं। इसके बाद रंगदारी, हत्या की साजिश, अपहरण, अवैध हथियार, भू-माफिया गतिविधियों और संगठित अपराध से जुड़े कई नए मामले दर्ज हुए। हाल के वर्षों में भी उसके खिलाफ हत्या और अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज किए गए थे।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि संजय सिंह से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फरारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था, उसका गिरोह वर्तमान में किन इलाकों में सक्रिय है और किन अपराधों में उसकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। इसके अलावा उसके आर्थिक नेटवर्क, अवैध खनन और भू-माफिया से जुड़े संबंधों की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह भी खंगाल रही है कि क्या उसके गिरोह के अन्य सदस्य अभी भी सक्रिय हैं और क्या हाल के कुछ चर्चित आपराधिक मामलों में उसका कोई संबंध रहा है। पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में कई अन्य अपराधियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
बिहार पुलिस इस गिरफ्तारी को संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी उपलब्धि मान रही है। वर्षों से फरार चल रहे इस कुख्यात अपराधी की गिरफ्तारी से पुलिस को उम्मीद है कि राज्य में सक्रिय अपराध नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। पुलिस का कहना है कि संजय सिंह के खिलाफ दर्ज सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उसे विभिन्न मामलों में रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
फिलहाल आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि संजय सिंह के अन्य संभावित आपराधिक मामलों और उसकी संपत्तियों की भी जांच जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो उसके खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। बिहार पुलिस ने कहा है कि राज्य में संगठित अपराध और वांछित अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।