1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 30, 2026, 12:07:39 PM
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस - फ़ोटो Google
Bharat Tiwari Encounter Case: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता देते हुए कहा कि वह वहां याचिका दायर कर सकता है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में उचित मंच हाईकोर्ट है।
यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने 21 जून को दायर की थी। याचिका में भोजपुर में हुई पुलिस मुठभेड़ को कथित तौर पर फर्जी एनकाउंटर बताते हुए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई थी। साथ ही, घटना में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच समिति गठित कर जांच कराने की भी मांग की गई थी।
इससे पहले सोमवार को जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया था। हालांकि, अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार के समक्ष मेंशनिंग करने का निर्देश दिया था।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने इसे मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की। इस पर अदालत ने पूछा कि संबंधित हाईकोर्ट जाने के बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया गया। पीठ ने याचिकाकर्ता की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इस मामले में उनका क्या संबंध है।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इस मामले से जुड़ी कुछ याचिकाएं पहले से लंबित हैं। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। अब शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद याचिकाकर्ता के पास कथित फर्जी एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर संबंधित हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का विकल्प उपलब्ध है।
गौरतलब है कि बिहार के भोजपुर में पुलिस मुठभेड़ के दौरान भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। परिवार और याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह मुठभेड़ फर्जी थी, जबकि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग की जा रही है।