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Bihar News: बिहार के किसानों के लिए सम्राट सरकार का बड़ा तोहफा! अब पूरी जमीन का करा सकेंगे फसल बीमा; बस करना होगा यह काम

बिहार सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू कर दी है। अब किसान जितनी चाहें उतनी जमीन का बीमा करा सकेंगे और फसल नुकसान पर मुआवजा पाएंगे।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 09, 2026, 6:32:27 AM

Bihar News: बिहार के किसानों के लिए सम्राट सरकार का बड़ा तोहफा! अब पूरी जमीन का करा सकेंगे फसल बीमा; बस करना होगा यह काम

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Bihar News: बिहार सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) लागू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही कई वर्षों से संचालित बिहार राज्य फसल सहायता योजना को समाप्त कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था किसानों को अधिक व्यापक सुरक्षा और बेहतर मुआवजा उपलब्ध कराएगी।


कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि रबी सीजन 2026-27 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना राज्यभर में लागू होगी। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित है और इसके माध्यम से किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि तथा अन्य कारणों से होने वाले फसल नुकसान की भरपाई का लाभ मिलेगा।


किसानों को क्या होगा फायदा?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बीमित भूमि की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है। पहले की योजना में रकबे को लेकर सीमाएं थीं, लेकिन अब किसान अपनी पूरी कृषि भूमि का बीमा करा सकेंगे। इससे छोटे किसानों के साथ-साथ बड़े जोत वाले किसानों को भी बराबर लाभ मिलेगा।


योजना के तहत बुआई से पहले होने वाले नुकसान से लेकर फसल कटाई के बाद तक की क्षति को भी कवर किया जाएगा। यानी यदि प्राकृतिक आपदा के कारण फसल बर्बाद होती है तो किसानों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी।


कितना देना होगा प्रीमियम?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों को बेहद कम प्रीमियम देना होगा। खरीफ फसलों के लिए किसानों को केवल 1.5 प्रतिशत प्रीमियम देना पड़ेगा, जबकि रबी फसलों के लिए यह दर 2 प्रतिशत तय की गई है। वहीं फल और सब्जी जैसी बागवानी फसलों के लिए किसानों को 5 प्रतिशत प्रीमियम राशि जमा करनी होगी।


बाकी प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर हिस्से में बीमा कंपनियों को करेंगी। खास बात यह है कि यह योजना पूरी तरह स्वैच्छिक होगी। केवल वही किसान प्रीमियम जमा करेंगे जो फसल बीमा का लाभ लेना चाहेंगे।


आधुनिक तकनीक से होगा नुकसान का आकलन

सरकार ने स्पष्ट किया है कि फसल क्षति और उपज का आकलन करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। सैटेलाइट इमेज, डिजिटल सर्वे और अन्य तकनीकी माध्यमों से नुकसान का आकलन किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को समय पर मुआवजा मिल सकेगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू होने से कृषि क्षेत्र में जोखिम कम होगा और किसानों का आर्थिक संरक्षण मजबूत होगा।


भूमि मापी शुल्क में भी बड़ा बदलाव

कैबिनेट बैठक में भूमि मापी शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। नए आदेश के अनुसार शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में भूमि मापी शुल्क लगभग दोगुना कर दिया गया है।


नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में स्थित रैयती भूमि की मापी के लिए अब प्रति खेसरा 2000 रुपये तथा अधिकतम 8000 रुपये शुल्क देना होगा। पहले यह शुल्क 1000 रुपये से 4000 रुपये तक था।


वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि मापी के लिए प्रति खेसरा 1000 रुपये और अधिकतम 4000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। पहले यह राशि 500 रुपये से 2000 रुपये तक थी।


तत्काल मापी की सुविधा के लिए शहरी क्षेत्रों में प्रति खेसरा 4000 रुपये तथा अधिकतम 16000 रुपये शुल्क तय किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये और अधिकतम 8000 रुपये शुल्क लिया जाएगा।


सरकार का कहना है कि नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं और इससे भूमि मापी सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जा सकेगा।