1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 17, 2026, 7:36:19 AM
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Bihar Land News : बिहार में जमीन विवाद से जुड़े मामलों पर पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल अंचल अधिकारी (सीओ) की रिपोर्ट के आधार पर किसी भी जमीन की जमाबंदी रद्द नहीं की जा सकती। यदि राज्य सरकार को किसी जमाबंदी पर आपत्ति है तो उसे सक्षम दीवानी न्यायालय में मुकदमा दायर करना होगा। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया अपनाए बिना प्रशासनिक स्तर पर जमाबंदी रद्द करना कानून के अनुरूप नहीं है।
यह फैसला जस्टिस सौरेंद्र पांडेय की एकलपीठ ने वाणी झा, विभूति कुमार और निर्मला देवी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2006 में पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से जमीन खरीदी थी। इसके बावजूद अंचल अधिकारी ने मृत व्यक्ति के नाम पर चल रही जमाबंदी को रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी और वर्ष 2021 में उसे निरस्त कर दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि करीब 90 वर्षों से चली आ रही जमाबंदी को राजस्व अधिकारी रद्द नहीं कर सकते। यदि सरकार को उस पर कोई आपत्ति है तो उसे स्वामित्व तय कराने के लिए सक्षम दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा।
वहीं, सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सीओ की रिपोर्ट के आधार पर अपर समाहर्ता ने जमाबंदी रद्द करने का आदेश दिया था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जमाबंदी रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार संबंधित जमीन पर अपना अधिकार या स्वामित्व स्थापित करना चाहती है तो वह सक्षम न्यायालय में वाद दायर करने के लिए स्वतंत्र है। इसके बाद अदालत कानून के अनुसार मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला करेगी।
क्या होती है जमाबंदी?
जमाबंदी किसी जमीन का आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड होता है, जिसमें मालिक का नाम, खाता-खेसरा, क्षेत्रफल, सीमा और अन्य जरूरी विवरण दर्ज रहते हैं। जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक लोन, मुआवजा और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए यह महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। भूमि विवादों में भी जमाबंदी एक अहम रिकॉर्ड के रूप में इस्तेमाल की जाती है।