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Bihar News : 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरा 3 साल का मासूम, 7 घंटे बाद जिंदा निकला; NDRF-SDRF के रेस्क्यू ने बचाई जान

7 घंटे तक पूरे गांव की सांसें अटकी रहीं... लेकिन आखिरकार खुशखबरी आई। गया के फतेहपुर में 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 3 वर्षीय पीयूष कुमार को NDRF और SDRF की टीम ने सकुशल बाहर निकाल लिया। पढ़िए कैसे चला यह चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 17, 2026, 9:35:43 AM

Bihar News : 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरा 3 साल का मासूम, 7 घंटे बाद जिंदा निकला; NDRF-SDRF के रेस्क्यू ने बचाई जान

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गया जी : बिहार के गया जिले से गुरुवार रात एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरे इलाके की सांसें थाम दी थीं। फतेहपुर प्रखंड के रंगून नगर में महज 3 वर्षीय मासूम पीयूष कुमार खेलते-खेलते करीब 300 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिर गया। हादसे की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, जबकि हजारों ग्रामीण घटनास्थल पर जुटकर बच्चे की सलामती की दुआ कर रहे थे।


करीब 7 घंटे तक चले हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने पीयूष को सकुशल बाहर निकाल लिया। जैसे ही मासूम को सुरक्षित बाहर लाया गया, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने राहत की सांस ली और मौके पर मौजूद टीमों के लिए तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया।


शाम 6:28 बजे हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 6:28 बजे पीयूष कुमार घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह नल-जल योजना के लिए खोदे गए खुले बोरवेल के पास पहुंच गया और अचानक उसमें गिर गया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई। देखते ही देखते पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव एजेंसियों की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।


NDRF और SDRF ने दिखाई तकनीकी दक्षता

रेस्क्यू अभियान आसान नहीं था। 300 फीट गहरे संकरे बोरवेल से मासूम को सुरक्षित निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने धैर्य, सूझबूझ और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए लगातार अभियान जारी रखा। करीब सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाहर आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं और "भारत माता की जय" तथा "एनडीआरएफ जिंदाबाद" के नारे भी लगाए।


अस्पताल में कराया गया मेडिकल चेकअप

रेस्क्यू के तुरंत बाद बच्चे को प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) फतेहपुर ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसका मेडिकल चेकअप किया। शुरुआती जांच में बच्चा सुरक्षित बताया गया, हालांकि डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी रखा गया ताकि किसी भी प्रकार की आंतरिक समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।


मौके पर मौजूद रहे कई अधिकारी

पूरे अभियान की निगरानी जिला प्रशासन कर रहा था। घटनास्थल पर वजीरगंज कैंप डीएसपी सुनील कुमार पांडेय, अंचलाधिकारी अमित सिंह, बीडीओ शशि भूषण साहू समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने लगातार रेस्क्यू टीमों के साथ समन्वय बनाए रखा, जिससे अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका।


स्वास्थ्य विभाग की तैयारी पर उठे सवाल

रेस्क्यू अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर भेजे गए पांच ऑक्सीजन सिलेंडरों में से चार खाली थे। इस बात को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। हालांकि प्रशासन ने तत्काल स्थिति को संभाला और किसी तरह की अव्यवस्था नहीं होने दी। बाद में आपदा प्रबंधन विभाग के एडीएम ने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही।


पूरे जिले में रेस्क्यू ऑपरेशन की हो रही चर्चा

पीयूष के सुरक्षित बाहर आने के बाद पूरे गया जिले में राहत और खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू अभियान में शामिल सभी अधिकारियों एवं कर्मियों की जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि टीमों की तत्परता, धैर्य और तकनीकी कौशल की बदौलत एक मासूम की जिंदगी बचाई जा सकी।


यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन अब पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर खुले बोरवेलों की सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे खुले बोरवेलों को तत्काल बंद कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।