1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 17, 2026, 8:03:38 AM
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पटना: बिहार में सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयानबाजी अब कानूनी दायरे में पहुंचती दिख रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक, भ्रामक और विवादित पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के 10 हैंडल्स पर बिहार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का आधिकारिक एक्स हैंडल भी शामिल बताया जा रहा है। साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने इन सभी हैंडल्स को 72 घंटे के भीतर विवादित कंटेंट हटाने का नोटिस जारी किया है। यदि तय समय के भीतर निर्देश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार में राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है और सोशल मीडिया चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा मंच बन चुका है। ऐसे में पुलिस की इस पहल ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने एक्स प्लेटफॉर्म को भेजे गए नोटिस में स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ साझा की गई कुछ पोस्ट आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करती हैं। इसलिए संबंधित कंटेंट को 72 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य है।अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो संबंधित हैंडल्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को है, लेकिन किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने, झूठी जानकारी फैलाने या आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
इस कार्रवाई की सबसे अधिक चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि नोटिस पाने वालों में राजद का आधिकारिक एक्स हैंडल भी शामिल है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव कई मौकों पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखे राजनीतिक हमले करते रहे हैं। उनके कुछ पोस्ट और भाषण सोशल मीडिया पर भी साझा किए जाते रहे हैं। पुलिस का मानना है कि कुछ पोस्टों में इस्तेमाल की गई भाषा मर्यादा की सीमा से बाहर है, जिसकी जांच की जा रही है। हालांकि इस मामले में राजद की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के आईजी रंजीत कुमार मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक, भ्रामक या कानून का उल्लंघन करने वाला कंटेंट मिलने पर संबंधित प्लेटफॉर्म को पहले नोटिस भेजा जाता है। यदि नोटिस के बाद भी कंटेंट नहीं हटाया जाता, तब कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल के दिनों में केवल राजनीतिक पोस्ट ही नहीं, बल्कि एआई की मदद से बनाए गए आपत्तिजनक फोटो और वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। ऐसे मामलों में भी लगातार कार्रवाई की जा रही है ताकि सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोका जा सके।
यह पहला मामला नहीं है जब मुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कार्रवाई हुई हो। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री को सोशल मीडिया पर धमकी देने के आरोप में बांका के एक युवक को गुजरात से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया आज राजनीतिक प्रचार और विरोध का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। लेकिन कई बार विरोध के नाम पर अपमानजनक भाषा, फर्जी दावे और भ्रामक सामग्री भी साझा की जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई यह संकेत देती है कि अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नोटिस पाने वाले हैंडल्स विवादित पोस्ट हटाते हैं या फिर मामला कानूनी लड़ाई तक पहुंचता है। फिलहाल बिहार पुलिस की इस कार्रवाई ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयानबाजी को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।