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Bihar Panchayat Tax : गांव में टैक्स की एंट्री! पक्का मकान, मंदिर, होटल, हाट तक पर लगेगा शुल्क, जानिए सरकार का पूरा प्लान

बिहार सरकार ने पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य की ग्राम पंचायतों में दो दर्जन से अधिक प्रकार के कर (टैक्स), शुल्क और फीस वसूली का रास्ता साफ हो गया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 17, 2026, 8:24:19 AM

Bihar Panchayat Tax : गांव में टैक्स की एंट्री! पक्का मकान, मंदिर, होटल, हाट तक पर लगेगा शुल्क, जानिए सरकार का पूरा प्लान

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Bihar Panchayat Tax : बिहार सरकार ने पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य की ग्राम पंचायतों में दो दर्जन से अधिक प्रकार के कर (टैक्स), शुल्क और फीस वसूली का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने पंचायतों द्वारा वसूले जाने वाले विभिन्न करों की अधिकतम दरें तय कर दी हैं। इनकी राशि 1 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक हो सकती है।


पंचायती राज विभाग के अनुसार, यह व्यवस्था बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-27 के तहत पहले से ही मौजूद थी। अब सरकार ने विभिन्न मदों में अधिकतम कर और शुल्क की सीमा तय कर दी है, जिससे पंचायतें अपनी आय बढ़ाकर विकास कार्यों पर अधिक खर्च कर सकें।


पक्का मकान पर सालाना 100 रुपये तक टैक्स

नई व्यवस्था के अनुसार पंचायत क्षेत्र में बने निजी आवासीय भवनों पर होल्डिंग टैक्स लगाया जाएगा। पक्के मकान के लिए अधिकतम 100 रुपये सालाना, जबकि अर्द्धपक्के मकान पर 50 रुपये तक टैक्स लिया जा सकेगा। मिट्टी के घरों को इस कर से पूरी तरह छूट मिलेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने घरों पर 25 रुपये वार्षिक कर का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह राशि संबंधित विभाग से ली जाएगी, लाभार्थियों से सीधे नहीं।


व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर ज्यादा शुल्क

व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत उपयोग वाले भवनों पर 100 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक वार्षिक कर लगाया जा सकेगा। इसके अलावा पंचायत क्षेत्र में संचालित कई व्यवसायों पर भी अलग-अलग शुल्क तय किए गए हैं।सिनेमा हॉल, विवाह भवन, होटल, पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसी जैसे प्रतिष्ठानों से सालाना अधिकतम 5,000 रुपये तक शुल्क लिया जा सकेगा। वहीं दो टन प्रति घंटा से अधिक क्षमता वाले राइस मिल और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी कर के दायरे में आएंगे।


मंदिर, हाट और मेले भी दायरे में

नई व्यवस्था के तहत पंचायत क्षेत्र में स्थित तीर्थ स्थल, मंदिर, हाट, मेला, पशु बाजार और बूचड़खाने पर भी निर्धारित शुल्क लिया जा सकेगा। पशु मेलों में बिक्री होने वाले पशुओं पर भी शुल्क वसूला जाएगा। इसके अलावा पंचायत की दुकानों, गुमटियों, बस पड़ाव और टेंपो स्टैंड से भी शुल्क लिया जाएगा।


पेयजल और सफाई के लिए मासिक शुल्क

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और कचरा उठाव जैसी सुविधाओं के लिए प्रत्येक उपभोक्ता परिवार से अधिकतम 30 रुपये प्रतिमाह शुल्क लिया जा सकेगा। सार्वजनिक शौचालयों के उपयोग पर भी शुल्क निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे पंचायतों को नियमित आय मिलेगी और स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।


सरकार ने बताई टैक्स की जरूरत

पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आय के स्थायी स्रोत जरूरी हैं। उनके अनुसार कर से मिलने वाली राशि का उपयोग गांवों में सड़क, सफाई, पेयजल, रोशनी और अन्य विकास कार्यों पर किया जाएगा। इससे पंचायतें आत्मनिर्भर बनेंगी और स्थानीय स्तर पर विकास की गति तेज होगी। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल केवल अधिकतम कर दरें तय की गई हैं। पंचायतें स्थानीय जरूरतों के अनुसार नियमों के तहत कर लागू करेंगी। आवश्यकता पड़ने पर इन दरों में भविष्य में संशोधन भी किया जा सकता है।


नई कर व्यवस्था को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है। विपक्ष पहले ही गांवों में टैक्स व्यवस्था को लेकर सवाल उठाता रहा है। वहीं सरकार का दावा है कि यह कदम ग्रामीण विकास और पंचायतों की आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी है।