1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 12, 2026, 4:05:56 PM
प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो
Patna News: पटना शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर निगम द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में शहर में कुल 31 वेंडिंग जोन बनाने की योजना तैयार की गई है, जिनमें से 19 वेंडिंग जोन के लिए जमीन और आवश्यक स्वीकृति मिल चुकी है।
फुटपाथी दुकानदारों को मिलेगा लाभ
इस योजना का उद्देश्य शहर के फुटपाथी दुकानदारों को एक स्थायी और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराना है। पटना में करीब 4400 रजिस्टर्ड दुकानदारों को इन वेंडिंग जोन में कम दरों पर दुकान लगाने की सुविधा मिलेगी। नगर निगम के अनुसार, प्रत्येक वेंडिंग जोन में लगभग 200 से 235 दुकानें होंगी। पूरी परियोजना पर करीब 124.4 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
किन इलाकों में बनेंगे वेंडिंग जोन?
नूतन राजधानी अंचल में 61.69 करोड़ रुपये की लागत से आठ वेंडिंग जोन बनाए जाएंगे। इनमें शेखपुरा रैन बसेरा, अमला टोला, पंच मंदिर, इको पार्क (डीपीएस के पास), चित्रगुप्त समाज मंदिर, साकेत नगर, बेऊर मोड़ और जंक्शन रोड मल्टी लेवल पार्किंग के पीछे जी प्लस वन वेंडिंग जोन शामिल हैं।
पाटलिपुत्र अंचल में 24.29 करोड़ रुपये की लागत से चार वेंडिंग जोन विकसित किए जाएंगे। इनमें मछली मार्केट के पास आरसीडी की जमीन, वार्ड 20 सब्जी मार्केट के पास, वार्ड 8 बीएमएसआईसीएल के सामने और वार्ड 24 दीघा पोस्ट के सूर्य मंदिर के पास आधुनिक जी प्लस वन परिसर शामिल हैं।
बांकीपुर अंचल में 18.82 करोड़ रुपये से मैकडोवेल गोलंबर, खेतान मार्केट के सामने बिरला मंदिर रोड पर जी प्लस वन वेंडिंग जोन और वार्ड 50 मुसल्लहपुर हाट के पास जी प्लस टू भवन बनाया जाएगा।
अजीमाबाद अंचल में 15.54 करोड़ रुपये से गांधी सेतु के नीचे, गायघाट और मीना बाजार में जी प्लस टू वेंडिंग जोन तैयार किए जाएंगे। वहीं पटना सिटी अंचल में 4.11 करोड़ रुपये की लागत से सती चौराहा और गुरु गोविंद सिंह लिंक पथ पर एक जी प्लस वन वेंडिंग जोन बनाया जाएगा।
म्यूनिसिपल बॉन्ड से फंडिंग का इंतजाम
इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम म्यूनिसिपल बॉन्ड के जरिए फंड जुटाएगा। पटना नगर निगम 200 करोड़ रुपये का म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने की तैयारी में है, जिसे सेबी से मंजूरी मिल चुकी है।
शहर में रजिस्टर्ड वेंडरों की संख्या
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, पटना शहर में लगभग 20,862 फुटपाथी दुकानदार रजिस्टर्ड हैं, हालांकि पिछले करीब 10 वर्षों से नए वेंडर कार्ड जारी नहीं किए गए हैं। इस नई योजना से शहर के बाजारों को व्यवस्थित करने और वेंडरों को स्थायी सुविधा देने की उम्मीद है।