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बिहार में शाही लीची की क्वालिटी सुधार को लेकर टास्क फोर्स का गठन, NLRC तैयार करेगा रिपोर्ट

Bihar News: बिहार की प्रसिद्ध शाही लीची को स्टिंग बग और अन्य बीमारियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री के निर्देश पर विशेषज्ञों की टास्क फोर्स गठित की गई है, जो प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर एक सप्ताह में रिपोर

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 09, 2026, 12:51:31 PM

बिहार में शाही लीची की क्वालिटी सुधार को लेकर टास्क फोर्स का गठन, NLRC तैयार करेगा रिपोर्ट

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Bihar News: बिहार की विश्व प्रसिद्ध शाही लीची पर इस बार बड़ा संकट मंडराने लगा है। राज्य के कई जिलों में लीची की फसल पर खतरनाक ‘स्टिंग बग’ कीट के हमले ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि फलों के खराब होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब इस गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है।


केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर लीची की फसल को बचाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह एक्सपर्ट टीम प्रभावित इलाकों का दौरा कर एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।


जानकारी के मुताबिक, इस बार बिहार के कई लीची उत्पादक जिलों में ‘स्टिंग बग’ नामक कीट तेजी से फैल रहा है। यह कीड़ा लीची के फलों को नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे फल समय से पहले खराब हो रहे हैं और उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया, तो इस सीजन में भारी नुकसान हो सकता है।


लगातार मिल रही शिकायतों और फसल की बिगड़ती स्थिति के बाद Indian Council of Agricultural Research के अंतर्गत आने वाले National Research Centre on Litchi ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञों की टीम गठित की है। यह टीम खेतों में पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से जांच करेगी कि आखिर फसल को कितना नुकसान हुआ है और किन उपायों से इसे बचाया जा सकता है।


बताया जा रहा है कि टास्क फोर्स सिर्फ नुकसान का आकलन ही नहीं करेगी, बल्कि किसानों को मौके पर ही जरूरी सलाह भी देगी। विशेषज्ञ यह बताएंगे कि कौन-से कीटनाशक प्रभावी हो सकते हैं, किन सावधानियों को अपनाने की जरूरत है और आगे इस तरह के हमलों से फसल को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।


इस विशेष टीम की जिम्मेदारी डॉ. विकास दास को सौंपी गई है। उनके नेतृत्व में बिहार राज्य बागवानी मिशन, उद्यान विभाग, पौधा संरक्षण निदेशालय और कृषि विश्वविद्यालयों के कई विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को शामिल किया गया है। खास तौर पर कीट विज्ञान विशेषज्ञों को भी टीम का हिस्सा बनाया गया है ताकि बीमारी की असली वजह और उसके स्थायी समाधान तक जल्द पहुंचा जा सके।