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दारोगा और IO ने फर्जी केस में पीड़ित को ही पहुंचा दिया जेल, IG विकास वैभव ने दोनों को किया सस्पेंड

Bihar Police News: जहानाबाद में फर्जी हत्या प्रयास मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। आईजी ने सर्किल इंस्पेक्टर और अनुसंधानकर्ता को निलंबित कर दिया, जबकि जांच में पीड़ित को ही गलत तरीके से जेल भेजने और गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 11, 2026, 3:09:03 PM

Bihar Police News

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Bihar Police News: बिहार के जहानाबाद में मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने एक झूठे हत्या के प्रयास के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में सर्किल इंस्पेक्टर रघुनाथ प्रसाद और अनुसंधानकर्ता श्रीकांत कुमार सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। दोनों पर विभागीय जांच भी शुरू करने का आदेश दिया गया है।


यह मामला नगर थाना कांड संख्या 336/25 से जुड़ा है। परस बिगहा थाना क्षेत्र के महमदपुर गांव निवासी रिशु राज को 24 फरवरी 2025 को विपक्षी अतुल आनंद ने मारपीट कर घायल कर दिया था। इलाज के बाद पीड़ित ने सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने का आवेदन दिया, लेकिन केस दर्ज नहीं किया गया। इसके बजाय, विपक्षी के कोर्ट परिवाद के आधार पर रिशु राज को ही हत्या के प्रयास के आरोप में जेल भेज दिया गया।


रिशु राज की शिकायत और आईजी स्तर पर की गई समीक्षा के दौरान 9 जून 2026 को जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। पाया गया कि अनुसंधान और पर्यवेक्षण में भारी लापरवाही की गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि कोर्ट परिवाद के आवेदक अतुल आनंद को यह तक जानकारी नहीं थी कि उनके आवेदन पर थाना में केस दर्ज किया गया है, जबकि केस डायरी में वादी और गवाहों के बयान दर्ज कर दिए गए थे।


जांच में फर्जी तरीके से बयान दर्ज करने, बिना ठोस साक्ष्य और बिना जख्म प्रतिवेदन के धारा 109 बीएनएस के तहत पीड़ित को ही आरोपी बनाकर न्यायिक हिरासत में भेजने की पुष्टि हुई। इसके बाद आरोप पत्र भी समर्पित कर दिया गया था।


पीड़ित रिशु राज ने यह भी आरोप लगाया कि अनुसंधानकर्ता ने उनसे 30 हजार रुपये की मांग की थी और पैसे न देने पर जेल भेजने की धमकी दी थी। आईजी ने इस पूरे मामले को घोर लापरवाही, मनमानी और स्वेच्छाचारिता का उदाहरण बताया है।


कार्रवाई के तहत नगर अंचल पुलिस निरीक्षक रघुनाथ प्रसाद और पुलिस अवर निरीक्षक श्रीकांत कुमार सिन्हा को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष दिवाकर विश्वकर्मा द्वारा पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई न करने के मामले की जांच का निर्देश पुलिस अधीक्षक अपराजित लोहान को दिया गया है। आईजी ने स्पष्ट किया है कि अनुसंधान में लापरवाही या पक्षपात किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।