1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 23, 2026, 6:48:15 AM
मंत्रियों की लिस्ट फाइनल! - फ़ोटो AI
पटना: बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली में दो दिनों तक रहने के बाद बुधवार को पटना लौटे है. बीजेपी सूत्र बता रहे हैं कि वे अपने पॉकेट में एक लिस्ट लेकर लौटे है. ये उन विधायकों की लिस्ट है जो मंत्रिमंडल विस्तार में नए मंत्री के तौर पर शपथ लेंगे. नए मंत्रियों की सूची में कई पुराने चेहरों का पत्ता साफ हो गया है.
दिल्ली में तय हुआ नाम
दरअसल दिल्ली में सम्राट चौधरी ने बीजेपी के कई नेताओं से मुलाकात की. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले. लेकिन काम की बातचीत बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से हुई. नितिन नबीन के साथ सम्राट चौधरी की लंबी बातचीत हुई और इस बैठक में बिहार बीजेपी के प्रभारी विनोद तावड़े भी मौजूद थे.
बीजेपी के एक बड़े नेता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में नए मंत्रियों का नाम तय करने का जिम्मा इस बार बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन को ही सौंप दिया है. नितिन नबीन के साथ सम्राट चौधरी की बैठक में नए मंत्रिमंडल के गठन और उसमें शामिल होने वाले चेहरों पर ही विशेष तौर पर चर्चा हुई.
जेडीयू से भी हो गई बात
बीजेपी सूत्रों ने बताया कि नए मंत्रिमंडल के गठन को लेकर जेडीयू से भी बातचीत हो गई है. सारा फार्मूला सेट हो चुका है. तभी दिल्ली से लौटने के बाद सम्राट चौधरी सीधे नीतीश कुमार के पास गए. सम्राट ने नीतीश से मंत्रियों के नाम पर ही चर्चा की. वैसे, सम्राट चौधरी दिल्ली जाने से पहले ही जेडीयू से मंत्रिमंडल विस्तार पर बातचीत कर चुके थे. मंगलवार को दिल्ली जाने से ठीक पहले सम्राट चौधरी ने जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के साथ काफी देर तक बैठक की थी.
मौजूदा सरकार का गणित
नीतीश कुमार के कार्यकाल में भाजपा के दो डिप्टी सीएम सहित कुल 14 मंत्री थे, जबकि जेडीयू कोटे से 9 मंत्री शामिल थे। इसके अलावा लोजपा-आर से दो, हम और रालोमो के एक-एक मंत्री थे। अब नई सरकार में भी लगभग यही संतुलन बनाए रखने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि कुछ नए चेहरों की एंट्री तय मानी जा रही है।
नए चेहरों को मौका, पुराने बाहर!
सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट विस्तार में भाजपा और जेडीयू के नए नेताओं को जगह मिल सकती है। ऐसे में कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। खासकर भाजपा कोटे में बदलाव के संकेत हैं, जहां संगठन और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
फ्लोर टेस्ट के बाद होगा विस्तार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 24 अप्रैल को विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। इसके बाद मई की शुरुआत में कैबिनेट विस्तार संभव है। हालांकि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के चलते भाजपा का फोकस फिलहाल वहां के प्रचार पर भी है, जिससे विस्तार की टाइमिंग प्रभावित हो सकती है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाएगा.
विजय सिन्हा पर टिकी नजर
कैबिनेट विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को लेकर है। पिछले मंत्रिमंडल के दौरान उनके तेवर और भूमिका को लेकर काफी चर्चा रही है। अब सवाल यह है कि क्या उन्हें दोबारा मंत्री पद मिलेगा या नहीं। अगर वापसी होती है तो उन्हें कौन सा विभाग दिया जाएगा, यह भी अहम होगा।
पुराने मंत्रियों का भविष्य अधर में
नीतीश सरकार में भाजपा कोटे से सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा के अलावा मंगल पांडे, दिलीप जायसवाल, रामकृपाल यादव, सुरेंद्र मेहता, संजय सिंह टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद, नारायण प्रसाद, रमा निषाद, लखेन्द्र रोशन, श्रेयसी सिंह और प्रमोद चंद्रवंशी जैसे नेता मंत्री थे। इनमें से कई चेहरों पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
जातीय समीकरण भी अहम फैक्टर
नई सरकार में जातीय संतुलन भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। कुशवाहा समाज से सीएम, जबकि यादव और भूमिहार समाज से डिप्टी सीएम बनाए जाने के बाद अन्य जातियों के प्रतिनिधित्व को लेकर दबाव बढ़ गया है। राजपूत समाज के मंत्रियों की संख्या में बदलाव भी चर्चा का विषय है।
क्या रहेगा कैबिनेट विस्तार का फॉर्मूला?
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट विस्तार का फॉर्मूला काफी हद तक पुराना ही रहेगा, लेकिन चेहरों में बदलाव होगा। भाजपा सभी वर्ग, जाति और क्षेत्र को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में यह तय करना चुनौतीपूर्ण होगा कि किसे दोबारा मौका मिले और किसे बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
ब्यूरो रिपोर्ट, फर्स्ट बिहार-झारखंड..