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आपके आवास तक कैसे पहुंची शराब की बोतल? रोहिणी आचार्य का सीएम सम्राट चौधरी से तीखा सवाल

Bihar Politics: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद मुख्यमंत्री आवास के पास शराब की बोतल मिलने पर सियासत तेज हो गई है। रोहिणी आचार्य ने सीएम सम्राट चौधरी से सवाल पूछा कि आखिर शराब मुख्यमंत्री आवास तक कैसे पहुंची और शराबबंदी कानून पर गंभीर सवाल खड़े कि

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated May 22, 2026, 2:09:00 PM

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रोहिणी का बड़ा हमला - फ़ोटो Google

Bihar Politics: पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद बिहार में शराब कहां से आ रही है? इस सवाल का जवाब न तो पुलिस के पास है और ना ही सरकार के पास और अगर है भी तो बड़ा सवाल है कि आखिर इसपर रोक क्यों नहीं लग रही है। पिछले दिनों पटना सचिवालय में एक अधिकारी के ऑफिस के बार डस्टबीन से शरीब की खाली बोतल मिली थी और अब सीएम आवास के पास शराब की बोतलें मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। सीएम हाउस के पास शराब की बोतल मिलने के बाद इसपर सियासत भी शुरू हो गई है।


लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने इसको लेकर सरकार पर हमला बोला है। रोहिणी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूछा है कि आखिर उनके आवास तक शराब की बोतल कैसे पहुंची। रोहिणी आचार्य ने एक्स पर एक अखबार की कटिंग शेयर करते हुए लिखा, “कहीं ऐसा तो नहीं कि अवैध शराब के कारोबारियों की पहुँच मुख्यमंत्री आवास तक है?


मुख्यमंत्री जी .. ये कैसी शराबबंदी है , जिसमें शराब की बोतल कभी उच्च सुरक्षा वाले विधानसभा परिसर में मिलती है ,  मंत्रियों - उच्चाधिकारियों के बैठने वाले सरकारी कार्यालयों  के गलियारे में मिलती है और सबसे सुरक्षित कही जाने वाली जगह आपके आधिकारिक आवास के समीप भी मिलती है ???


मुख्यमंत्री जी .. आपके आवास के समीप तक कैसे पहुँची शराब की बोतल ? आपके आवास के समीप बैठ कर कौन पी रहा है शराब ? कहीं ऐसा तो नहीं कि अवैध शराब के कारोबारियों की पहुँच मुख्यमंत्री आवास तक है ?


मुख्यमंत्री जी .. आपके आवास के समीप शराब की बोतल पाए जाने से ही स्पष्ट है कि बिहार में शराबबंदी का कानून महज फाईलों और बयानबाजी तक ही सीमित है और बिहार का कोई भी कोना ऐसा नहीं है , जहाँ शराब सुलभता से उपलब्ध नहीं है.


मुख्यमंत्री जी .. पूरे बिहार में अब ये आम धारणा कायम हो चुकी है कि "अवैध शराब के कारोबारियों का रसूख , उनकी पहुँच सरकार - शासन - प्रशासन से ज्यादा है , शराब का अवैध कारोबार सत्ता - शासन - प्रशासन के संरक्षण में अपने परवान पर है और शराबबंदी के कानून को सफल बताने के तमाम दावे महज शगूफाबाजी हैं".