1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 08, 2026, 7:14:50 PM
आचार्य बनने की तैयारी - फ़ोटो सोशल मीडिया
DESK: अगर आपको लगता है कि पढ़ाई की एक तय उम्र होती है, तो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के 75 वर्षीय मिल्खी राम की कहानी आपकी सोच बदल सकती है। 32 डिग्रियां हासिल कर चुके मिल्खी राम अब अपनी 33वीं डिग्री के लिए संस्कृत में एमए (आचार्य समकक्ष) की पढ़ाई कर रहे हैं।
कांगड़ा जिले के गांदर क्षेत्र निवासी मिल्खी राम ने 30 जून को हमीरपुर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के अध्ययन केंद्र में संस्कृत विषय की परीक्षा दी। परीक्षा केंद्र पर मौजूद सभी अभ्यर्थियों में वह सबसे अधिक उम्र के परीक्षार्थी थे। उनकी सीखने की लगन आज पूरे प्रदेश में प्रेरणा का विषय बनी हुई है।
नौकरी के साथ जारी रखी पढ़ाई
10 फरवरी 1952 को जन्मे मिल्खी राम ने वर्ष 1972 में वन विभाग में नौकरी शुरू की। नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने शिक्षा का दामन नहीं छोड़ा। वर्ष 1976 में धर्मशाला के एक निजी कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने लगातार उच्च शिक्षा प्राप्त करना जारी रखा।
सेवानिवृत्ति तक 26 डिग्रियां, अब कुल 32
वर्ष 2010 में वन विभाग से ग्रेड-1 अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त होने तक मिल्खी राम 26 डिग्रियां हासिल कर चुके थे। इसके बाद भी उनका पढ़ाई का सिलसिला नहीं रुका और आज उनके पास कुल 32 डिग्रियां हैं। उन्होंने बीएड, प्रभाकर, एलएलबी, पत्रकारिता, संस्कृत में बीए, हिंदी, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, इतिहास, अंग्रेजी और अर्थशास्त्र में एमए, एमबीए, एमफिल तथा हिंदी में पीएचडी जैसी अनेक शैक्षणिक उपाधियां प्राप्त की हैं। अब वह संस्कृत में एमए कर 'आचार्य' की उपाधि हासिल करने की तैयारी में जुटे हैं।
ज्ञान सबसे बड़ी संपत्ति
मिल्खी राम का कहना है कि ज्ञान ऐसी संपत्ति है, जिसे कोई छीन नहीं सकता। उनका मानना है कि शिक्षा ही व्यक्ति और समाज के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए युवाओं को हर परिस्थिति में पढ़ाई को प्राथमिकता देनी चाहिए।उन्होंने अपनी इस लंबी शैक्षणिक यात्रा का श्रेय अपनी पत्नी विद्या देवी को दिया, जो वन विभाग से ग्रेड-1 अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उनके बेटे राकेश कुमार भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के अधिकारी हैं। मिल्खी राम का कहना है कि पत्नी, बेटे और बहू के सहयोग ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। हाल ही में उन्होंने आंखों का इलाज भी कराया ताकि पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में कोई बाधा न आए।
हमीरपुर अध्ययन केंद्र के प्रभारी प्रोफेसर संजय कुमार ने कहा कि मिल्खी राम की कहानी यह साबित करती है कि सफलता उम्र से नहीं, बल्कि सीखने की इच्छा, अनुशासन और समर्पण से मिलती है। उनका जीवन उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटी-छोटी चुनौतियों के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं।