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लालू-राबड़ी की सुरक्षा के मामले में बैकफुट पर सरकार: दोनों को मिली Z श्रेणी की सुरक्षा और बुलेटप्रूफ गाड़ी

लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दोनों नेताओं को Z श्रेणी की सुरक्षा और बुलेटप्रूफ वाहन उपलब्ध करा दिए गए हैं। सुरक्षा को लेकर हुए सियासी विवाद के बाद सरकार के इस फैसले को बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jul 03, 2026, 10:22:38 PM

Bihar Politics

बैकफुट पर बिहार सरकार - फ़ोटो Google

PATNA: बिहार में नीतीश कुमार की 'सम्राट' सरकार लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था के मामले में बैकफुट पर आ गई है।सरकार ने अब दोनों नेताओं को जेड (Z) श्रेणी की सुरक्षा बहाल कर दी है, जिसमें बुलेटप्रूफ गाड़ी भी शामिल है। यह फैसला उस जोरदार सियासी ड्रामे के बाद लिया गया है, जब लालू परिवार ने अपनी सारी सुरक्षा वापस कर दी थी।


विवाद की पृष्ठभूमि

इससे पहले सरकार ने लालू यादव और राबड़ी देवी की जेड प्लस (Z+) सुरक्षा वापस ले ली थी और उन्हें केवल पूर्व मुख्यमंत्री वाले सुरक्षा प्रोटोकॉल दे दिए थे। इस कदम से राजद शिविर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। विपक्ष ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से लिया गया फैसला बताया था।


इसके जवाब में लालू परिवार ने सनसनीखेज कदम उठाते हुए अपनी पूरी सुरक्षा वापस कर दी थी, जिससे राज्य के प्रमुख विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। मुद्दा काफी गरमा गया था और विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे।


सरकार का यू-टर्न

लगातार आलोचना और राजनीतिक दबाव के बाद सरकार को झुकना पड़ा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को Z कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है। हालांकि यह पहले की Z+ सुरक्षा से कम है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री सुरक्षा से बेहतर मानी जा रही है।दोनों नेताओं को बुलेटप्रूफ वाहन भी उपलब्ध कराया गया है।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

राजद नेताओं ने  कहा है कि सरकार को जनता और राजनीतिक दबाव के आगे झुकना पड़ा। एक वरिष्ठ राजद नेता ने कहा, “सरकार ने अपनी गलती स्वीकार की है, लेकिन हमें Z+ सुरक्षा बहाल करने की मांग है, क्योंकि लालू यादव पूर्व केंद्रीय मंत्री और कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।”एनडीए सरकार ने इसे “सुरक्षा एजेंसियों की नई आकलन रिपोर्ट के आधार पर लिया गया सामान्य फैसला” बताया है।


यह घटनाक्रम बिहार की सियासी सरगर्मी को दर्शाता है, जहां प्रमुख नेताओं की सुरक्षा अक्सर सत्ता संघर्ष का हथियार बन जाती है। आगामी चुनावों को देखते हुए अन्य नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी इस फैसले का असर पड़ सकता है।