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बिहार के एक 'थानेदार' को 3 सजा की सजा...25 हजार का जुर्माना, 6 हजार रू घूस लेते निगरानी ब्यूरो ने किया था गिरफ्तार

निगरानी अदालत ने गया जिले के अतरी के तत्कालीन थानाध्यक्ष लाल बाबू प्रसाद को रिश्वत मामले में दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी को 2006 में 6 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Apr 08, 2026, 6:12:22 PM

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AI से सांकेतिक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar News: घूस लेते गिरफ्तार किए गए थानेदार को निगरानी अदालत ने दोषी करार दिया है. कोर्ट ने थानेदार को तीन साल की सजा और 25 हजार रू का जुर्माना लगाया है. थानेदार को 20 साल पूर्व 6 हजार रू रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था. 

थानेदार को मिली सजा 

आज 8 अप्रैल को निगरानी कोर्ट पटना ने गया जिले अतरी के तत्कालीन थानाध्यक्ष लाल बाबू प्रसाद को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तह्त निगरानी थाना कांड संख्या-62/2006 में दोषी ठहराया गया है. यह मामला धनन्जय सिंह ने अतरी के तत्कालीन थानाध्यक्ष लाल बाबू प्रसाद के खिलाफ दर्ज कराया था. जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनके भाई एवं चाचा को झूठा केस में फंसाने की घमकी देने एवं केस से बरी करने के एवज् में 8,000 रूपये रिश्वत माॅंग रहे हैं. आरोपी को 13 अक्टूबर 2006 को 6,000/- रूपया रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता रणवीर सिंह, पुलिस निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा सटीक एवं समय पर आरोप-पत्र दायर किया गया।

 बिहार सरकार की ओर विशेष लोक अभियोजक निगरानी, पटना ने प्रभावी तरीके से पैरवी की और आरोपी को दोष सिद्ध कराने में सफलता हासिल की। लाल बाबू प्रसाद, सम्प्रति थाना प्रभारी, अतरी, जिला-गया को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 में तीन वर्ष सश्रम कारावास एवं 25,000/-(पच्चीस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। धारा-13(2) सह पठित धारा-13(1)(डी) में तीन वर्ष सश्रम कारावास एवं 25,000/- (पच्चीस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर एक महीने का साधारण कारावास होगा। दोनों सजा साथ-साथ चलेगी।
   

निगरानी ब्यूरो की तरफ से बताया गया है कि अब तक वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के 7 मामले में न्यायालय द्वारा सजा सुनायी गई है। ये दोषसिद्ध की कार्रवाई मो0 रूस्तम, माननीय न्यायाधीश, निगरानी के न्यायालय पटना द्वारा की गई है।