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13 साल पुराने JDU नेता हत्याकांड में बड़ा फैसला, RJD के पूर्व विधायक रणजीत यादव समेत चार आरोपी बरी

Bihar Crime News: गया की अदालत ने 13 साल पुराने जदयू नेता सुमीरक यादव हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए साक्ष्यों के अभाव में राजद के पूर्व विधायक रणजीत यादव समेत चार आरोपियों को बरी कर दिया।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jul 17, 2026, 7:24:01 PM

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प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो File

Bihar Crime News: बिहार में करीब 13 वर्ष पुराने सुमीरक यादव हत्याकांड में गया की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। एडीजे-3 अजित कुमार की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में राजद के पूर्व विधायक रणजीत यादव समेत चार आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।



शुक्रवार को एडीजे-3 अजित कुमार की अदालत ने कांड संख्या 21/2013 में सुनवाई पूरी करते हुए पूर्व विधायक रणजीत यादव, उनके भाई विवेक यादव, साला पंकज यादव और दीपू को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए सभी आरोपियों को बरी किया जाता है। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता बनवारी प्रसाद, ताज अली और अमरेंद्र कुमार ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अरुण कुमार शर्मा और शकील अहमद ने दलीलें पेश कीं।



यह मामला वर्ष 2013 में अतरी विधानसभा क्षेत्र का है। उस समय इलाके में राजनीतिक वर्चस्व को लेकर तनाव का माहौल था। 26 फरवरी 2013 को जदयू कार्यकर्ता सुमीरक यादव की हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि जब वह पार्टी कार्यालय से घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।



अभियोजन के अनुसार, सुमीरक यादव अतरी क्षेत्र में जदयू के नए कार्यालय के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उस समय क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव को लेकर विभिन्न दलों के बीच तनाव था। इसी पृष्ठभूमि में इस हत्याकांड को अंजाम दिए जाने का आरोप लगाया गया था। घटना के बाद मृतक के भाई विजय यादव के बयान पर नीमचक बथानी थाना में कांड संख्या 21/2013 दर्ज किया गया था। इस मामले ने उस समय गया से लेकर पटना तक राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा बटोरी थी।



पुलिस जांच के बाद पूर्व विधायक कुंती देवी और उनके परिवार के कई सदस्यों के नाम इस मामले में सामने आए थे। वर्ष 2021 में एडीजे-3 की अदालत ने कुंती देवी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में जेल में बीमारी के दौरान उनका निधन हो गया।



बाद में पटना हाईकोर्ट ने रणजीत यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ किया था। उनकी याचिका खारिज होने के बाद स्पीडी ट्रायल के तहत सुनवाई शुरू हुई। लंबे समय तक चली बहस, गवाहों के बयान और साक्ष्यों की जांच के बाद अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए रणजीत यादव समेत चार आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार में निराशा का माहौल है, जबकि पूर्व विधायक रणजीत यादव के समर्थकों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। 

रिपोर्ट- नितम राज, गयाजी