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बिहार में साइबर ठगी का बड़ा खेल: एक बैंक अकाउंट से देशभर में 15 करोड़ की ठगी, 200 से अधिक मामले दर्ज

बेगूसराय में साइबर थाना पुलिस ने देशभर में 15 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़े बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। आरोपी ने महज 3.75 लाख रुपये के लालच में अपना बैंक खाता साइबर अपराधियों को दे दिया था, जिसके जरिए 205 साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं।

1st Bihar Published by: HARERAM DAS Updated May 17, 2026, 11:47:54 AM

बिहार में साइबर ठगी का बड़ा खेल: एक बैंक अकाउंट से देशभर में 15 करोड़ की ठगी, 200 से अधिक मामले दर्ज

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो File

Bihar Cyber Crime: बेगूसराय में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच साइबर थाना पुलिस को एक बड़ी और चौंकाने वाली सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने करोड़ों रुपए की ऑनलाइन ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए फुलवड़िया इलाके से एक युवक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार युवक का बैंक खाता देशभर में साइबर ठगी के पैसों के ट्रांजैक्शन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।


सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि आरोपी ने अपना बैंक खाता महज 3 लाख 75 हजार रुपए के लालच में साइबर अपराधियों को सौंप दिया था। इसके बाद उसी खाते के जरिए अलग-अलग राज्यों में करोड़ों रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी के खाते से जुड़े मामलों में अब तक पूरे देश से 205 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।


बेगूसराय पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई पटना से सूचना मिलने के बाद साइबर थाना में कांड संख्या 34/26 दर्ज कर जांच शुरू की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। जांच के दौरान साइबर थाना पुलिस ने फुलवड़िया थाना क्षेत्र अंतर्गत फुलवरिया गांव निवासी सुरेश महतो का पुत्र सुनील कुमार को गिरफ्तार किया।


जब पुलिस ने आरोपी के बैंक खाते की गहन जांच की तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। पिछले करीब 8 महीनों में इस खाते के खिलाफ देशभर के अलग-अलग राज्यों से 205 शिकायतें NCRP पोर्टल पर दर्ज मिलीं। इन शिकायतों में ठगी गई रकम का कुल आंकड़ा करीब 15 करोड़ 25 लाख 35 हजार 307 रुपए तक पहुंच गया।


पूछताछ में आरोपी ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उसने बताया कि इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क में तीन अन्य लोग भी शामिल हैं। साइबर अपराधी उसके बैंक खाते का इस्तेमाल “म्यूल अकाउंट” के तौर पर कर रहे थे। यानी लोगों से ठगी गई रकम पहले इसी खाते में जमा कराई जाती थी, फिर वहां से अलग-अलग खातों और जगहों पर ट्रांसफर कर दी जाती थी, ताकि असली अपराधियों तक पुलिस आसानी से न पहुंच सके।


पुलिस सूत्रों के अनुसार, साइबर गिरोह अब ग्रामीण इलाकों के लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते खरीद रहे हैं। कई लोगों को यह तक नहीं पता होता कि उनके खाते का इस्तेमाल करोड़ों की साइबर ठगी में किया जा रहा है। यही वजह है कि साइबर अपराध का नेटवर्क अब छोटे शहरों और गांवों तक तेजी से फैलता जा रहा है।


फिलहाल साइबर थाना की विशेष टीम मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस वैज्ञानिक तरीके से पूरे ट्रांजैक्शन नेटवर्क और डिजिटल लिंक की जांच में जुटी हुई है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर या ओटीपी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें, वरना अनजाने में वे भी साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं।