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बड़ा खेल : परिवहन विभाग में टैक्स घोटाला...अदना सा ऑपरेटर पर केस, हिसाब-किताब लेने वाले 'डीटीओ-नाजिर' साफ बच गए, शिकायत के बाद DM को जांच का जिम्मा

भोजपुर जिला परिवहन कार्यालय में 69 लाख रुपये के टैक्स घोटाले का मामला सामने आया है. डाटा एंट्री ऑपरेटर पर केस दर्ज हुआ है, लेकिन नाजिर और डीटीओ की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. परिवहन विभाग ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 11, 2026, 1:25:00 PM

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AI से सांकेतिक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar Transport News: परिवहन विभाग में टैक्स की राशि से अपनी तिजोरी भरने का खुला खेल चल रहा . पहले रोहतास इसके बाद भोजपुर में एक ही डाटा ऑपरेटर ने टैक्स राशि का गबन किया और आराम से निकल भागा. मामले का खुलासा हुआ तो आरोपी डाटा ऑपरेटर पर केस दर्ज कर जिम्मेदारी खत्म हो गई. बाकी सभी जिम्मेदार पदधारक बच निकले. जानकार बताते हैं कि टैक्स घोटाले के इस खेल में ऑपरेटर तो छोटी मछली है, कार्रवाई तो नाजीर और डीटीओ पर होनी चाहिए थी. परिवहन विभाग ने जांच को आगे बढ़ाने में रूचि नहीं ली. विभाग ने जब इस घपले में कोई कार्रवाई नहीं किया तब शिकायत दर्ज कराई गई. इसके बाद परिवहन विभाग की नींद खुली है. मुख्यालय स्तर से जांच की बजाय पत्र जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जांच करने को कहा गया है. 

सिर्फ ऑपरेटर, नाजिर-डीटीओ दोषी नहीं ?  घोटाले की उच्च प्राथमिकता देकर जांच कराएं   

परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव ने 20 मार्च 2026 को भोजपुर के जिलाधिकारी को पत्र लिखा. जिसमें कहा गया कि जिला परिवहन कार्यालय भोजपुर में 69 लाख रू से अधिक के टैक्स घोटाले की विस्तृत जांच करें. परिवहन विभाग के पत्र में कहा गया है कि भोजपुर जिला ट्रक एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय यादव ने परिवाद दिया है.जिसमें परिवहन कार्यालय भोजपुर के डाटा एंट्री ऑपरेटर अजय कुमार सिंह के द्वारा टैक्स की नगद राशि 69 लाख 11698 रुपए का गबन किया गया हैय इस आरोप में जिले के नवादा थाना में कांड संख्या 43/2026 दर्ज है. शिकायत में यह भी अंकित किया गया है कि उक्त राशि का गबन अकेले डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा किया जाना संभव नहीं है. इस मामले में तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी एवं कार्यालय के नाजिर/ अन्य कर्मी की संलिप्त भी हो सकती है. ऐसे में इन आरोपों की विस्तृत जांच कराई जाए. परिवहन विभाग ने कहा है कि चूंकि मामला सरकारी राशि के गबन का है, जो अत्यंत ही गंभीर प्रकृति का है .लिहाजा आरोपों की सूक्ष्मता की जांच करना जरूरी है. ऐसे में इसे उच्च प्राथमिकता देते हुए जांच कराएं और रिपोर्ट दें. 

डाटा ऑपरेटर से हिसाब-किताब लेने की जिम्मेदारी किसकी थी ? 

भोजपुर डीटीओ में डाटा ऑपरेटर ने 69 लाख रू का गबन किया. वर्तमान डीटीओ ने भले ही आरोपी डाटा ऑपरेटर पर केस दर्ज कराया हो, लेकिन खेल इतने भर का नहीं है. इस घपले में डाटा ऑपरेटर सिर्फ मोहरा है, असली खिलाड़ी तो बचा हुआ है. सवाल यहीं से खड़ा हो रहा है. क्या सिर्फ डाटा ऑपरेटर इतना बड़ा खेल कर सकता है ? क्या एक दिन या एक हफ्ते में डाटा ऑपरेटर के पास टैक्स के रूप में 69 लाख रू जमा हो सकता है ? क्या डाटा ऑपरेटर टैक्स कलेक्शन की राशि प्रति दिन नाजिर के माध्यम से सरकारी खजाने में जमा नहीं कराता था ? जिला परिवहन कार्यालय में टैक्स वसूली का जिम्मा डीटीओ के पास होता है, वे ही इसकी निगरानी करते हैं, अगर डाटा ऑपरेटर सरकारी पैसे को खजाने में जमा नहीं कर रहा था,तब जिला परिवहन पदाधिकारी और नाजिर क्या कर रहे थे ? यह जांच का विषय है. 

भोजपुर डीटीओ में 69 लाख के घोटाले का केस 

भोजपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी के आवेदन पर 13 जनवरी 2026 को नवादा थाने में आरोपी डाटा ऑपरेटर अजय कुमार सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. सरकारी राजस्व (मोटरवाहन कर राशि) सरकारी खजाने में जमा नहीं करने के कारण तत्कालीन डाटा इंट्री ऑपरेटर अजय कुमार सिंह जिला परिवहन कार्यालय भोजपुर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. डीटीओ भोजपुर के पत्र में कहा गया है कि जांच के क्रम में पाया गया है कि कार्यालय में पदस्थापित तत्कालीन डाटा इंट्री ऑपरेटर अजय कुमार सिंह द्वारा आरटीपीएस काउंटर से नकद के रूप में संग्रह की गई टैक्स की राशि 69 लाख,11 हजार 698 रू सरकारी खजाने में जमा नहीं किया है. 

इस संबंध में आरोपी कर्मी से 9 दिसंबर 2025 और 2 जनवरी 2026 को पत्र लिखकर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था. साथ ही यह भी कहा गया था कि अगर आप जवाब नहीं देते हैं तो यह माना जायेगा कि आपके द्वारा राशि का गबन किया गया है. लेकिन दो बार पत्राचार के बाद भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट नहीं किया. जिससे प्रमाणित होता है कि आरोपी ने सरकारी राशि का गबन किया है. ऐसे में सरकारी राशि के गबन के आरोप में तत्कालीन डाटा अंट्री ऑपरेटर अजय कुमार सिंह के खिलाफऱ केस दर्ज कर राशि की वसूली को लेकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाय. जिला परिवहन पदाधिकारी के मिले पत्र के आलोक में थानाध्यक्ष ने केस सं-43/26 दर्ज किया है. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 316 (4), 318(4) के तहत मुकदमा किया है.