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शिक्षा मंत्री का दावा हुआ फुस्स ! आरोपी DEO-DPO पाक-साफ होकर निकल रहे, एक और डीईओ को विभाग ने दिया क्लिनचिट, फिर करोड़ों का बेंच-डेस्क घोटाला किसने किया ?

सरकारी स्कूलों में बेंच-डेस्क खरीद घोटाले में बड़ा मोड़ आया है. दरभंगा के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी समर बहादुर सिंह को शिक्षा विभाग ने क्लीन चिट दे दी है. विभागीय जांच में सभी आरोप अप्रमाणित पाए गए और निलंबन अवधि को भी ड्यूटी माना गया.

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Apr 11, 2026, 2:10:26 PM

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Bihar education News: सरकारी स्कूलों में बेंच-डेस्क खरीद में भारी घोटाला हुआ. करोड़ों की राशि का वारा-न्यारा किया गया. खेल में शिक्षा विभाग के अधिकारी से लेकर ठेकेदार तक शामिल थे. इस बड़े घोटाले पर खूब राजनीति हुई, विधानसभा में जब सरकार की भद्द पिटी तो दिखावे के लिए कार्रवाई भी हुई.कई जिलों के डीईओ-डीपीओ को सस्पेंड किया गया. जब मामला शांत होने लगा, तो आरोपी अधिकारियों को चुपके से बचाया जाने लगा. विभागीय कार्यवाही में बेंच-डेस्क खरीद घोटाले के आरोपी जिला शिक्षा पदाधिकारी-कार्यक्रम पदाधिकारियों को क्लिनचिट दी जा रही है. दरभंगा के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी विभाग ने पाक-साफ करार दे दिया है. 

पाक साफ करार दे दिए गए डीईओ

शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन मनोरंजन कुमार ने 10 अप्रैल 2026 को पत्र जारी किया है. जिसमें दरभंगा के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी समर बहादुर सिंह को क्लीन चिट देने का आदेश जारी किया है. साथ ही निलंबन अवधि को कर्तव्य पर बिताई गई अवधि मानी गई. शिक्षा विभाग के पत्र में कहा गया है कि तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी दरभंगा समर बहादुर सिंह को 28 नवंबर 2024 के प्रभाव से निलंबित किया गया था. इनके खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही प्रारंभ की गई.  30 जून 2025 से इन्हें निलंबन मुक्त कर राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद महेंद्र में संयुक्त निदेशक बनाया गया. समर बहादुर सिंह के खिलाफ संचालित अनुशासनिक कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके विरुद्ध प्रतिवेदित सभी आरोपों को अप्रमाणित पाया. समीक्षा के बाद 10 नवंबर 2025 को ही इन्हें आरोप मुक्त करते हुए मामले को समाप्त किया गया. अब समर बहादुर सिंह के निलंबन अवधि को सभी प्रयोजनों के लिए कर्तव्य पर बिताई गई अवधि मानी जाएगी.

जांच रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग ने डीईओ को किया था निलंबित

बता दें, शिक्षा विभाग के अपर सचिव सह निदेशक (प्रशासन) सुबोध कुमार चौधरी ने विभिन्न गंभीर आरोपों से संबंधित जांच प्रतिवेदन के आलोक में दरभंगा के तत्कालीन डीईओ समर बहादुर सिंह तथा एसएसए डीपीओ रवि कुमार को निलंबित कर दिया था. दरभंगा प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सह आयुक्त के सचिव सत्येंद्र कुमार द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन के आलोक में दोनों पदाधिकारी पर प्रथम दृष्टिया गंभीर आरोप प्रतीत होने की वजह से निलंबित किया गया था. डीईओ समर बहादुर सिंह एवं डीपीओ पर संयुक्त रूप से बेंच डेस्क, समरसेबल पंप, फैब्रिकेटेड भवन निर्माण, व्हीलचेयर का क्रय एवं भवन मरम्मती में बड़े पैमाने पर अवैध उगाही किए जाने के आरोप लगे थे. इसके अलावा बीपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा टीआरई वन एवं टू की काउंसलिंग में भ्रष्टाचार करने, अवैध उगाही के लिए एमएल एकेडमी में समानांतर जिला शिक्षा कार्यालय संचालित किए जाने तथा परीक्षा शाखा इसी परिसर में संचालित कराए जाने के कारण विद्यालय में पठन-पाठन बाधित रहने से संबंधित गंभीर आरोप थे. 

सारे आरोप हुए हवा....मंत्री जी भ्रष्टाचार पर प्रहार की निकली हवा

आरोप की जांच को लेकर शिक्षा विभाग ने आरडीडीइ सह आयुक्त के सचिव के नेतृत्व में कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी द्वारा समर्पित प्रतिवेदन के आलोक में डीईओ एवं डीपीओ पर निलंबन की कार्रवाई हुई थी. हालांकि विभागीय कार्यवाही में सारे आरोप हवा हो गए और वो अधिकारी जिन्हें निलंबित कर शिक्षा विभाग के मंत्री जो भ्रष्टाचार पर जो वाहवाही लुटी थी, सब हवा हो गई. अधिकारी जांच में पाक साफ करार दे दिए गए, निलंबन अवधि को कर्तव्य पर बिताई मानी गई, वेतन का पूर्ण पैसा रिलीज होगा. ऐसा आदेश शिक्षा विभाग ने जारी कर दिया है.