1st Bihar Published by: SAURABH KUMAR Updated Jul 07, 2026, 10:14:13 AM
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Bihar News: सूचना के अधिकार (RTI) कानून की अनदेखी सीतामढ़ी के तत्कालीन सिविल सर्जन को महंगी पड़ गई। राज्य सूचना आयोग ने समय पर और सही सूचना उपलब्ध नहीं कराने के मामले में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश प्रसाद पर 25,000 का जुर्माना लगाया है।
मामला RTI कार्यकर्ता यदुवंश पंजियार द्वारा दायर आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने सीतामढ़ी जिले में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों की सूची, उनके द्वारा ली जाने वाली फीस तथा जिले में संचालित रजिस्टर्ड नर्सिंग होम की जानकारी मांगी थी। आरोप है कि मांगी गई सूचना निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध नहीं कराई गई।
इतना ही नहीं, करीब तीन वर्ष बाद जो जवाब दिया गया, वह भी अधूरा और गलत पाया गया। इसके बाद यदुवंश पंजियार ने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि लोक सूचना पदाधिकारी द्वारा सूचना देने में गंभीर लापरवाही बरती गई और RTI अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।
इसी आधार पर तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश प्रसाद पर 25,000 का आर्थिक दंड लगाया गया। राज्य सूचना आयोग के इस फैसले को सूचना के अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि समय पर और सही सूचना उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।