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पाकिस्तानी कनेक्शन से चल रहा था साइबर ठगी का खेल, मोतिहारी में दबिश के बाद 4 शातिर गिरफ्तार

Cyber Fraud Gang: बिहार के मोतिहारी में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सबको चौंका दिया है। पुलिस कार्रवाई में एक ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसके तार विदेशों तक जुड़े बताए जा रहे हैं—आखिर कैसे चल रहा था यह पूरा नेटवर्क?

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 15, 2026, 5:46:03 PM

पाकिस्तानी कनेक्शन से चल रहा था साइबर ठगी का खेल, मोतिहारी में दबिश के बाद 4 शातिर गिरफ्तार

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Motihari Cyber Fraud Gang: मोतिहारी में पुलिस की एक बड़ी कार्रवाई ने साइबर अपराध की उस परत को उजागर कर दिया है, जो सीधे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ी हुई थी। कल्याणपुर थाना क्षेत्र के खटोलवा गांव में गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरोह की खास बात यह थी कि इसके तार पाकिस्तान समेत विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े हुए थे, जो भारत में बैठकर लोगों को निशाना बना रहे थे।


पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को फंसाने के लिए फर्जी विज्ञापन तैयार किए जाते थे। इसके अलावा ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी धमकियों का इस्तेमाल कर लोगों में डर पैदा किया जाता था। आम लोगों को यह यकीन दिलाया जाता था कि वे किसी कानूनी मुसीबत में फंस गए हैं, और इससे बचने के लिए उन्हें तुरंत पैसे ट्रांसफर करने होंगे। घबराए हुए लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे ठगों के जाल में फंस जाते थे।


इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड अंकित कुमार बताया जा रहा है, जिसे पुलिस ने सबसे पहले हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह और उसके साथी विदेशों में बैठे साइबर ठगों के संपर्क में थे और उनके निर्देश पर ही पूरा खेल चलाते थे। ठगी से जो पैसा मिलता था, उसे खास माध्यमों के जरिए बाहर भेजा जाता था और बदले में गिरोह के सदस्यों को करीब 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। यानी यह सिर्फ स्थानीय स्तर का अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का हिस्सा था।


अंकित की निशानदेही पर पुलिस ने तीन और आरोपियों—युवराज कुमार, मोहम्मद साहिल और चुन्नू कुमार उर्फ अतुल कुमार—को गिरफ्तार किया। ये सभी अलग-अलग भूमिकाओं में इस गिरोह के लिए काम कर रहे थे और लोगों को फंसाने से लेकर पैसे के लेन-देन तक की जिम्मेदारी संभालते थे।


छापेमारी के दौरान पुलिस को कई अहम सुराग भी हाथ लगे हैं। आरोपियों के पास से 7 बैंक पासबुक, 10 एटीएम कार्ड, एक ब्लैंक चेक, 5 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और 3 मोटरसाइकिल बरामद की गई हैं। इन सामानों के जरिए पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है। आशंका है कि इस गिरोह ने अब तक बड़ी संख्या में लोगों को अपना शिकार बनाया है।


पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इसके अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।