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Bihar crime: 50 करोड़ का खेल! पूर्व डीएसपी गौतम कुमार का राजदार निकला किशनगंज थानाध्यक्ष अभिषेक, हर काम के लिए फिक्स था कमीशन; अब EOU ने बुलाया

किशनगंज के पूर्व थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप लगे हैं। EOU ने पूछताछ की तैयारी शुरू कर दी है और जांच तेज हो गई है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 16, 2026, 7:14:24 AM

Bihar crime: 50 करोड़ का खेल!  पूर्व डीएसपी गौतम कुमार का राजदार निकला किशनगंज थानाध्यक्ष अभिषेक, हर काम के लिए फिक्स था कमीशन; अब EOU ने बुलाया

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Bihar crime : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है। इस बार जांच के घेरे में किशनगंज नगर थानाध्यक्ष रहे अभिषेक कुमार रंजन आ गए हैं, जिन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। ईओयू ने उन्हें पूछताछ के लिए पटना स्थित मुख्यालय में उपस्थित होने का नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें अगले सप्ताह सोमवार को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।


ईओयू की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि अभिषेक कुमार रंजन ने अपने सेवाकाल के दौरान करीब 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है। यह संपत्तियां केवल बिहार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पश्चिम बंगाल, दिल्ली-एनसीआर और अन्य कई राज्यों में फैली हुई बताई जा रही हैं। जांच एजेंसियों को सिलीगुड़ी में एक फ्लैट, दार्जिलिंग रोड के पास जमीन और अन्य कई निवेशों के दस्तावेजों की जानकारी मिली है, जिनकी फंडिंग के स्रोतों की गहन जांच की जा रही है।


ईओयू की टीम लगातार इन संपत्तियों के सत्यापन में जुटी हुई है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और क्या इसमें किसी प्रकार की अवैध कमाई या भ्रष्टाचार का इस्तेमाल किया गया है। जांच के दौरान कई संदिग्ध लेनदेन भी सामने आए हैं, जिन्हें लेकर अलग-अलग स्तर पर पड़ताल जारी है।


सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में ईओयू की एक टीम पश्चिम चंपारण के सिकटा स्थित उनके ससुराल भी पहुंची थी। हालांकि, छापेमारी की भनक पहले ही लग जाने के कारण वहां से कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज या बड़ी बरामदगी नहीं हो सकी। इसके बावजूद जांच एजेंसियां लगातार डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।


यह मामला तब और गंभीर हो गया जब किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच के दौरान अभिषेक कुमार रंजन का नाम सामने आया। जांच में यह संकेत मिले कि दोनों अधिकारियों के बीच गहरे संबंध थे और वे एक-दूसरे के “राजदार” माने जाते थे। ईओयू को शक है कि दोनों ने मिलकर अवैध कमाई का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया था।


जांच रिपोर्ट के अनुसार, अभिषेक कुमार रंजन के स्थानीय स्तर पर बालू माफिया, शराब माफिया, एंट्री माफिया और अन्य अवैध कारोबारियों से करीबी संबंध थे। आरोप है कि इन माफियाओं को संरक्षण देने के बदले उन्हें नियमित रूप से बड़ी मात्रा में कमीशन मिलता था। इसी अवैध आय को बाद में जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया, जिससे नामी और बेनामी संपत्तियों का एक बड़ा जाल तैयार हुआ।


ईओयू के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसमें कई स्तरों पर भ्रष्टाचार और अवैध लेनदेन शामिल हो सकते हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर होता जा रहा है।


इस पूरे प्रकरण ने पुलिस विभाग में भी हलचल मचा दी है। लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों ने विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईओयू का कहना है कि सभी आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।


फिलहाल अभिषेक कुमार रंजन से पूछताछ की तैयारी अंतिम चरण में है। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान उनसे उनकी संपत्तियों, बैंक लेनदेन, निवेश और माफिया नेटवर्क से जुड़े संबंधों को लेकर विस्तृत सवाल पूछे जाएंगे। साथ ही उन्हें अपने बचाव में दस्तावेज और बयान पेश करने का पूरा अवसर दिया जाएगा।


यह मामला बिहार में चल रही भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई के तहत एक और बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसमें जांच एजेंसियां लगातार प्रभावशाली अधिकारियों और उनके कथित अवैध नेटवर्क पर शिकंजा कस रही हैं।