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Bihar News : बिहार में जमीन मापी हुई महंगी! जानिए E-Mapi की नई फीस और ऑनलाइन प्रक्रिया; शहर और गांव के भी बदलें रेट

बिहार सरकार ने जमीन की ई-मापी के लिए नई शुल्क व्यवस्था लागू कर दी है। अब शहरी क्षेत्रों में 1000 और ग्रामीण इलाकों में 500 रुपये प्रति खेसरा शुल्क लगेगा।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 16, 2026, 8:30:38 AM

Bihar News : बिहार में जमीन मापी हुई महंगी! जानिए E-Mapi की नई फीस और ऑनलाइन प्रक्रिया; शहर और गांव के भी बदलें रेट

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Bihar News : बिहार सरकार ने जमीन की ई-मापी (E-Mapi) को लेकर नई और स्पष्ट शुल्क व्यवस्था लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में जमीन की मापी के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग दरें तय कर दी गई हैं। सरकार का उद्देश्य भूमि मापी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और डिजिटल बनाना है, ताकि आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और समय की बचत हो सके।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार अब नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में जमीन की ई-मापी कराने पर प्रति खेसरा 1000 रुपये शुल्क देना होगा। वहीं ग्रामीण इलाकों में यह शुल्क 500 रुपये प्रति खेसरा तय किया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब पूरे राज्य में एक समान और पारदर्शी शुल्क संरचना लागू हो गई है।


पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी

सरकार ने ई-मापी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। अब किसी भी व्यक्ति को जमीन की मापी के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही करना होगा। इसके लिए आवेदकों को बिहारभूमि पोर्टल पर जाकर आवेदन फॉर्म भरना होगा और निर्धारित शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन ही करना होगा।


विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी तरह का ऑफलाइन आवेदन या नकद भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की संभावना भी काफी हद तक कम हो जाएगी।


लोगों को क्या होगा फायदा?

नई ई-मापी व्यवस्था से आम नागरिकों को कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पूरी प्रक्रिया घर बैठे ही पूरी की जा सकेगी। आवेदन से लेकर भुगतान और स्थिति की जानकारी तक सभी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, डिजिटल प्रक्रिया होने से समय की भी काफी बचत होगी। पहले जहां जमीन मापी में कई दिनों या हफ्तों का समय लग जाता था, वहीं अब यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज और व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सकेगी।


भूमि विवाद कम करने की कोशिश

बिहार सरकार का मानना है कि इस डिजिटल ई-मापी प्रणाली से भूमि से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी। अक्सर गलत मापी या अस्पष्ट रिकॉर्ड के कारण जमीन विवाद उत्पन्न होते हैं। नई व्यवस्था में सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से इस तरह की समस्याओं में कमी आने की संभावना है।


सरकार लगातार भूमि सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है। बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से पहले भी कई सेवाओं को ऑनलाइन किया गया था, और अब ई-मापी को भी पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ दिया गया है।


पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

राजस्व विभाग का कहना है कि इस नई व्यवस्था से सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। ऑनलाइन सिस्टम में हर आवेदन और भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं बचेगी। इसके साथ ही, नागरिकों को अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी और मापी की स्थिति भी ऑनलाइन ट्रैक करने की सुविधा मिलेगी। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद और सरल बन जाएगी।


कुल मिलाकर बिहार सरकार की यह नई ई-मापी व्यवस्था डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए तय की गई अलग-अलग फीस संरचना और पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे न केवल समय और धन की बचत होगी बल्कि भूमि विवादों में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।