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Bihar politics : सम्राट चौधरी बने बिहार के नए सीएम, मगध से अंग पहुंचा सीएम का कारवां; इलाके से तीसरे मुख्यमंत्री

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद संभाला है। जानिए कैसे अंग क्षेत्र बना बिहार की नई सत्ता का केंद्र।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 16, 2026, 7:35:58 AM

Bihar politics : सम्राट चौधरी बने बिहार के नए सीएम, मगध से अंग पहुंचा सीएम का कारवां; इलाके से तीसरे मुख्यमंत्री

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Bihar politics : बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सम्राट चौधरी ने राज्य की कमान संभाल ली है। 15 अप्रैल की सुबह शपथ ग्रहण के बाद सम्राट चौधरी ने औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला और नई सरकार की प्राथमिकताओं पर काम शुरू कर दिया। उनके साथ जेडीयू कोटे से दो डिप्टी सीएम—विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव—ने भी शपथ ली।


शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सम्राट चौधरी ने सचिवालय में मुख्य सचिव समेत सभी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और विभिन्न विभागों के सचिव शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि फाइलों के निपटारे में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को तेज और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया और अफसरों को स्पष्ट चेतावनी दी कि जनता से जुड़े कामों में ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।


नई सरकार के गठन के साथ ही बिहार की राजनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों में भी बदलाव देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पद अब मगध क्षेत्र से निकलकर अंग क्षेत्र में पहुंच गया है। सम्राट चौधरी अंग क्षेत्र के मुंगेर जिले के तारापुर से आते हैं और वहीं से विधायक चुने गए हैं। अंग क्षेत्र में भागलपुर, मुंगेर, बांका, लखीसराय और जमुई जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र की कुल 21 विधानसभा सीटों में हाल के चुनाव में एनडीए ने 20 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ साबित की थी, जबकि विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा था।


इस बदलाव को बिहार की राजनीति में क्षेत्रीय संतुलन के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी अंग क्षेत्र से कुछ नेता मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे हैं, लेकिन उनकी अवधि सीमित रही। कांग्रेस शासनकाल में जमुई के चंद्रशेखर सिंह 1983 से 1985 तक मुख्यमंत्री रहे थे। वे करीब 1 साल 210 दिन तक इस पद पर रहे और बाद में केंद्र सरकार में मंत्री बनाए गए। इसके बाद भागलपुर के भागवत झा आजाद 1988 से 1989 तक मुख्यमंत्री रहे, जिनका कार्यकाल लगभग एक साल से थोड़ा अधिक रहा।


इसके अलावा 1980 के दशक के अंत और 1990 के शुरुआती वर्षों में बिहार की राजनीति तेजी से बदलती रही। कांग्रेस के कमजोर होने के बाद 1990 में सारण क्षेत्र के लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने राज्य की राजनीति की दिशा ही बदल दी। उनके बाद उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने भी मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद मगध क्षेत्र से नीतीश कुमार, जीतन राम मांझी और फिर दोबारा नीतीश कुमार राज्य के मुख्यमंत्री बने।


सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। उनके नेतृत्व में सरकार की प्राथमिकताओं, प्रशासनिक सुधारों और विकास योजनाओं पर सबकी नजरें टिकी हैं। खासकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई सरकार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाते हुए विकास की गति को कैसे आगे बढ़ाती है।