1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 15, 2026, 10:32:40 PM
बच्चों के नाम बदलने का विवाद - फ़ोटो सोशल मीडिया
DESK: अगर आपके बेटे का नाम जालिम सिंह, शैतान, घसीटाराम, मक्खी, मक्खन, भयंकर, अहंकार, उग्र सिंह, जयचंद, नत्थू, बेचारा दास, फकीर राम, अवकाश जैसे नाम रखने को कोई कहे और बेटियों का नाम अर्धांगिनी, कलयुगी, कैकेई, अहिंसा, मनोरंजनी, सजनी रखने की सलाह दे तो आपकों कैसा लगेगा?
जी हां राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों के नाम बदलने को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से निर्देश जारी किया गया है। 3000 नामों की सूची भी तैयार की गयी है। जिसने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले को लेकर अभिभावकों, शिक्षकों और विपक्ष ने गंभीर आपत्ति जताई है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने निर्देश दिया कि सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 9 तक दाखिले के दौरान यदि बच्चों के नाम “अटपटे” पाए जाते हैं तो उन्हें अभिभावकों की सहमति से बदला जाएगा। इसके बाद शिक्षा विभाग ने संभावित नामों की एक सूची तैयार कर सभी 65 हजार स्कूलों को भेजी, जिसमें करीब 3000 नाम शामिल हैं।
इस सूची में कई ऐसे नाम शामिल किए गए हैं, जिन्हें लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इनमें जालिम सिंह, शैतान, घसीटाराम, मक्खी, मक्खन, भयंकर, अहंकार, उग्र सिंह, जयचंद, नत्थू, बेचारा दास, फकीर राम, अवकाश जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं लड़कियों के लिए अर्धांगिनी, कलयुगी, कैकेई, अहिंसा, मनोरंजनी, सजनी जैसे नाम सुझाए गए हैं।
हालांकि, सूची जारी होने के बाद इसमें कई त्रुटियां भी सामने आई हैं। कुछ नाम गलत श्रेणी में रखे गए हैं, लड़कों के नाम लड़कियों की सूची में और लड़कियों के नाम लड़कों की सूची में शामिल पाए गए हैं। करीब एक चौथाई नामों में व्याकरण और मात्रा की गलतियां भी बताई जा रही हैं। इस “सार्थक नाम अभियान” को लेकर विपक्ष, शिक्षक संगठनों और अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह पहल शिक्षा की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
वहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर अपने पहले के कई विवादित फैसलों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन, कम होती छात्र संख्या और शिक्षा व्यवस्था की गंभीर समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या एक करोड़ से घटकर लगभग 70 लाख रह गई है। करीब 83 हजार क्लासरूम जर्जर हालत में हैं और शिक्षकों के लाखों पद खाली पड़े हैं।
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास सहित कई लोगों ने इस फैसले की आलोचना की है। शिक्षक संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न तो व्यावहारिक है और न ही स्वीकार्य, और इससे शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।