1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 20, 2026, 9:39:51 AM
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Bihar Hindi News : सहरसा में बीपीएससी अभ्यर्थी के साथ कथित बर्बर पिटाई का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में सहरसा पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बलवाहाट थाना में पदस्थापित दरोगा शिल्पी कुमारी को निलंबित कर दिया है। घटना सामने आने के बाद जिले में हड़कंप मच गया था और लोगों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार, बीपीएससी की तैयारी कर रहे एक छात्र को किसी मामले में पूछताछ के लिए थाना लाया गया था। आरोप है कि थाना परिसर में छात्र के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। पिटाई के कारण छात्र की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद मामला तेजी से फैल गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
घटना की जानकारी मिलते ही सहरसा एसपी हिमांशु ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल प्रारंभिक जांच के आदेश दिए। शुरुआती जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद दरोगा शिल्पी कुमारी को निलंबित कर दिया गया। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि छात्र के साथ वास्तव में अमानवीय व्यवहार हुआ है तो इसमें शामिल सभी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि कानून की रक्षा करने वालों द्वारा ही यदि इस तरह की घटना होगी तो आम जनता का भरोसा कमजोर होगा।
वहीं छात्र संगठनों और बीपीएससी अभ्यर्थियों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर घटना की निंदा करते हुए न्याय की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि पुलिस को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए और किसी भी अभ्यर्थी या आम नागरिक के साथ हिंसक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस विभाग अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। थाना परिसर में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। साथ ही पीड़ित छात्र और उसके परिजनों का बयान दर्ज किया जा रहा है ताकि घटना की सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके। सहरसा पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। प्रशासन यह भी सुनिश्चित करने में जुटा है कि मामले को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित न हो।
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों का कहना है कि पुलिस हिरासत में किसी भी प्रकार की मारपीट या दुर्व्यवहार पर सख्त रोक लगनी चाहिए। फिलहाल पूरे मामले पर जिले भर की नजर टिकी हुई है और लोग आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। इंसाफ की मांग के बीच अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।