1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 04, 2026, 6:55:27 AM
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Bihar News : बिहार में ग्राम पंचायतों द्वारा हर घर से सालाना 1200 रुपये टैक्स वसूली के प्रस्ताव को लेकर नया मोड़ आ गया है। एक ओर 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय कर व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार ने इस शर्त का विरोध करते हुए इसे समाप्त करने की मांग उठाई है।
दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग से संबंधित राष्ट्रीय कार्यशाला में बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि बिहार जैसे राज्य में प्रत्येक परिवार से सालाना 1200 रुपये टैक्स वसूलने की अनिवार्य शर्त व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने आयोग से इस प्रावधान में राहत देने की मांग करते हुए कहा कि इससे गरीब और ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि वित्त आयोग से मिलने वाली अनुदान राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ ग्रामीण विकास के लिए किया जाएगा। उनका कहना है कि इन पैसों से ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को अधिक मजबूत बनाया जाएगा, जिससे गांवों में सड़क, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा।
जानकारी के अनुसार 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत बिहार को वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच करीब 52 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। पहले वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 6670 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। हालांकि पूरी राशि प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को भी लगभग 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी देनी होगी। इसके अलावा कुल अनुदान का एक हिस्सा पंचायतों और राज्य के प्रदर्शन के आधार पर जारी किया जाएगा।
राष्ट्रीय कार्यशाला में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने भी हर घर से 1200 रुपये टैक्स वसूलने की अनिवार्य शर्त को हटाने की मांग रखी। बैठक में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह सहित विभिन्न राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
दरअसल, वित्त आयोग की सिफारिशों का उद्देश्य पंचायतों की अपनी आय बढ़ाना है ताकि वे केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रहें। इसी सोच के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भी नगर निकायों की तर्ज पर स्थानीय कर व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार पंचायतें सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पेयजल आपूर्ति और अन्य स्थानीय सेवाओं के लिए शुल्क या कर वसूल सकती हैं।
बिहार में भी इस दिशा में प्रारंभिक तैयारी की जा चुकी है। पंचायती राज विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग से सहमति प्राप्त कर ली है। हालांकि अंतिम निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही लागू होगा। इसी बीच राज्य सरकार ने केंद्र के सामने यह मुद्दा उठाकर संकेत दे दिया है कि वह मौजूदा स्वरूप में इस व्यवस्था को लागू करने के पक्ष में नहीं है।
यदि केंद्र सरकार वित्त आयोग की शर्तों में बदलाव करती है तो ग्रामीण परिवारों को हर साल 1200 रुपये टैक्स देने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है। वहीं यदि शर्तें यथावत रहती हैं, तो भविष्य में पंचायतों को स्थानीय सेवाओं के लिए कर या उपयोग शुल्क वसूलने की व्यवस्था लागू करनी पड़ सकती है।
फिलहाल इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित टैक्स व्यवस्था को लेकर आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।