1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 04, 2026, 8:18:07 AM
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पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों सरकारी आवास को लेकर जबरदस्त चर्चा है। पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सरकार की ओर से उन्हें 10 सर्कुलर रोड स्थित पुराने सरकारी बंगले को खाली करने का नोटिस दिया गया, इसके बाद लालू परिवार ने आवास खली कर दिया। इसके बदले भवन निर्माण के तरफ से उन्हें (राबड़ी देवी ) 39 हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित किया गया है। हालांकि अब तक राबड़ी देवी ने नए आवास में शिफ्ट होने की कोई पहल नहीं की है, जिससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दरअसल, 39 हार्डिंग रोड का सरकारी बंगला वर्षों से एक खास वजह से चर्चा में रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे "अनलकी बंगला" कहा जाता है। दावा किया जाता है कि इस आवास में रहने वाले कई नेताओं का राजनीतिक भविष्य पहले जैसा नहीं रहा। यही कारण है कि इस बंगले को लेकर तरह-तरह की मान्यताएं और चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं।
बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली कर दिया है। सरकार का कहना है कि नए नियमों के तहत उन्हें दूसरा सरकारी आवास आवंटित किया गया है। लेकिन राबड़ी देवी की ओर से इस बंगले को लेकर सहमति तो दिखाई गई लेकिन शर्त यह रखा गया कि इसे रीलोवेट करवाया जाए,इसके बाद भवन निर्माण विभाग इसकी तैयारी में भी लग गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि भले भी यह आवास राबड़ी देवी को मिला है लेकिन राबड़ी परिवार यहां रहने वाला नहीं है। इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर वह 39 हार्डिंग रोड वाले सरकारी बंगले में शिफ्ट क्यों नहीं होना चाहती हैं। इस सवाल का जवाब लोग उस बंगले के पुराने इतिहास में तलाश रहे हैं।
पटना का 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी बंगला लंबे समय से राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा रहा है। कई नेताओं का मानना है कि इस आवास में रहने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव कम हो गया। यही वजह है कि समय के साथ इस बंगले की पहचान एक ऐसे सरकारी आवास के रूप में बन गई, जिसे कई नेता अपने राजनीतिक भविष्य के लिहाज से शुभ नहीं मानते। हालांकि इस धारणा का कोई आधिकारिक या वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा लगातार होती रही है।
39 हार्डिंग रोड वाले सरकारी आवास में अलग-अलग राजनीतिक दलों के कई वरिष्ठ नेता रह चुके हैं। इनमें राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के पूर्व मंत्री शामिल हैं। राजद के पूर्व मंत्री भूपेंद्र प्रसाद वर्मा और शमीम अहमद इस बंगले में रह चुके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन मोहन झा ने भी मंत्री रहते हुए इसी आवास का उपयोग किया था। वहीं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री चंद्र मोहन राय, विनोद नारायण झा और रामसूरत राय भी इसी बंगले में रह चुके हैं।
राजनीतिक चर्चाओं में अक्सर कहा जाता है कि इस बंगले में रहने वाले कई नेताओं को बाद में मंत्री पद नहीं मिला। इतना ही नहीं, समय के साथ उनकी राजनीतिक सक्रियता और प्रभाव भी पहले जैसा नहीं रहा। इसी वजह से इस बंगले को लेकर "अनलकी" होने की धारणा मजबूत होती चली गई।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी नेता का राजनीतिक भविष्य जनता के समर्थन, पार्टी की रणनीति और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। किसी सरकारी आवास का किसी नेता के राजनीतिक उतार-चढ़ाव से सीधा संबंध साबित नहीं किया जा सकता।
39 हार्डिंग रोड के बंगले को लेकर दो तरह की राय सामने आती है। एक वर्ग इसे महज संयोग मानता है, जबकि दूसरा वर्ग इसे राजनीतिक अंधविश्वास से जोड़कर देखता है। बिहार की राजनीति में पहले भी कई सरकारी आवासों और भवनों को लेकर ऐसी चर्चाएं होती रही हैं। राजनीतिक इतिहास में कई बार नेताओं ने कुछ खास आवासों या कार्यालयों को शुभ और अशुभ मानने की बातें सार्वजनिक रूप से भी कही हैं। हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
राबड़ी देवी ने अभी तक नए सरकारी आवास में जाने को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या वह 39 हार्डिंग रोड वाले बंगले की छवि की वजह से वहां नहीं जाना चाहती हैं या इसके पीछे कोई और प्रशासनिक अथवा राजनीतिक कारण है। सरकार की ओर से उन्हें आवास आवंटित किए जाने के बावजूद अब तक शिफ्टिंग नहीं होने से यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
बिहार में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच सरकारी आवास का यह विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। सत्ता पक्ष इसे सरकारी नियमों के पालन का मामला बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव के तौर पर पेश कर रहा है।आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राबड़ी देवी सरकार के निर्देश का पालन करते हुए नए आवास में शिफ्ट होती हैं या फिर यह मामला और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ता है।
फिलहाल 39 हार्डिंग रोड का सरकारी बंगला एक बार फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में है। हालांकि इसे लेकर प्रचलित "अनलकी" होने की धारणा केवल राजनीतिक चर्चाओं और संयोगों पर आधारित है, जिसका कोई आधिकारिक या प्रमाणित आधार उपलब्ध नहीं है। फिर भी इस बंगले का इतिहास और इससे जुड़ी कहानियां बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा का विषय बनी रही हैं।