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Bihar News : सरकारी स्कूल में 1.90 लाख का खेल? शिक्षा विभाग की जांच शुरू, प्रधानाध्यापक से मांगे गए सभी रिकॉर्ड

भागलपुर के कहलगांव स्थित +2 उच्च विद्यालय एकचारी में 1.90 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग ने प्रधानाध्यापक को तलब कर जांच शुरू कर दी है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 04, 2026, 7:01:13 AM

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Bihar news - फ़ोटो Ai photo

Bihar News: बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड स्थित +2 उच्च विद्यालय एकचारी में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। विद्यालय में स्कूल ग्रांट और शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) मद की करीब 1.90 लाख रुपये की राशि में वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिलने पर समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) ने प्रधानाध्यापक को सभी वित्तीय अभिलेखों के साथ तलब किया है। विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।


शिकायत के अनुसार विद्यालय को विभिन्न विकास कार्यों और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई राशि का निर्धारित नियमों के अनुसार उपयोग नहीं किया गया। आरोप है कि पीएफएमएस (PFMS) खाते से कुल 1,90,000 रुपये की निकासी की गई, लेकिन खर्च का पूरा विवरण और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इस शिकायत के बाद शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया है।


प्रबंध समिति ने दर्ज कराई शिकायत

जानकारी के मुताबिक, विद्यालय प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव, सहसचिव और कोषाध्यक्ष ने एक जुलाई को लिखित आवेदन देकर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा गया कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने सरकारी राशि की निकासी तो कर ली, लेकिन उसका उपयोग विद्यालय के विकास और छात्रों के हित में नहीं किया गया। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी।


दो मदों की राशि पर उठे सवाल

शिकायत के अनुसार विवादित राशि में 1,47,000 रुपये स्कूल ग्रांट और 43,000 रुपये शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) मद के शामिल हैं। इन दोनों मदों का उद्देश्य विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना और छात्रों के लिए आवश्यक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना है। ऐसे में राशि के उपयोग को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।


प्रधानाध्यापक से मांगा गया स्पष्टीकरण

समग्र शिक्षा अभियान की डीपीओ ने प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी कर बिंदुवार जवाब देने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें संबंधित बैंक खाते की पासबुक, बैंक स्टेटमेंट, कैश बुक, रोकड़ पंजी, स्टॉक रजिस्टर, व्यय पंजी तथा भुगतान से जुड़े सभी मूल वाउचर और अन्य वित्तीय अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। विभाग इन दस्तावेजों के आधार पर यह जांच करेगा कि सरकारी राशि का उपयोग नियमानुसार किया गया या नहीं।


विशेष जांच समिति करेगी पड़ताल

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच समिति का गठन किया जाएगा। समिति विद्यालय के वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तार से जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि राशि की निकासी और खर्च सरकारी नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।


सरकारी धन के उपयोग पर बढ़ी निगरानी

हाल के वर्षों में सरकारी विद्यालयों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि के उपयोग पर शिक्षा विभाग ने निगरानी बढ़ाई है। सरकार का उद्देश्य है कि स्कूलों को मिलने वाली प्रत्येक राशि का उपयोग छात्रों की शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने में हो। ऐसे मामलों में अनियमितता मिलने पर विभाग सख्त कार्रवाई की नीति अपना रहा है।


जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल शिक्षा विभाग ने प्रधानाध्यापक से जवाब तलब कर लिया है और सभी वित्तीय रिकॉर्ड की जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं। यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, शिक्षा विभाग का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जाएगी, ताकि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता बनी रहे और छात्रों के हितों से किसी प्रकार का समझौता न हो।