1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 08, 2026, 2:45:53 PM
Bihar Health Department - फ़ोटो ai photo
Bihar News : बिहार में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा कर्मियों की छुट्टियों को लेकर नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। अब सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी स्वास्थ्य कर्मियों के अवकाश का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। जिला स्वास्थ्य समिति ने सभी प्रखंड स्तरीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि हर महीने कर्मचारियों की अवकाश सूची तैयार कर उसका विधिवत संधारण किया जाए।
विभाग का मानना है कि कई बार स्वास्थ्य कर्मियों के बिना समुचित व्यवस्था के छुट्टी पर चले जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। इसे देखते हुए अब अवकाश प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी कर्मियों द्वारा लिए जाने वाले अवकाश का पूरा विवरण निर्धारित प्रारूप में दर्ज किया जाएगा। इसमें आकस्मिक अवकाश (सीएल), विशेष अवकाश (एसएल), सामान्य अवकाश (एनएल) और अन्य स्वीकृत छुट्टियों का रिकॉर्ड भी शामिल रहेगा।
अस्पताल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी की छुट्टी का विवरण समय पर रजिस्टर में दर्ज हो और आवश्यकता पड़ने पर विभाग को उपलब्ध कराया जा सके। केवल मौखिक सूचना या व्हाट्सएप संदेश के आधार पर अवकाश प्रबंधन नहीं चलेगा, बल्कि उसका आधिकारिक रिकॉर्ड भी तैयार करना होगा।
विभागीय समीक्षा में सामने आया है कि कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों के एक साथ अवकाश पर चले जाने से नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। इसका सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं की जांच, नियमित टीकाकरण अभियान, बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों पर पड़ रहा था।
विशेष रूप से एएनएम और अन्य फील्ड स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण कई पंचायतों में नियमित टीकाकरण (आरआई) कार्यक्रम समय पर संचालित नहीं हो पा रहे थे। इससे विभागीय योजनाओं की प्रगति और रिपोर्टिंग भी प्रभावित हो रही थी।
जिला स्वास्थ्य समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में औचक निरीक्षण के दौरान यदि किसी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में अवकाश रजिस्टर का सही संधारण नहीं पाया गया या रिकॉर्ड में अनियमितता मिली, तो संबंधित स्वास्थ्य प्रबंधक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी अस्पताल प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि अवकाश संबंधी अभिलेख नियमित रूप से अपडेट रखें और किसी भी समय जांच के लिए उपलब्ध कराएं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यदि किसी स्वास्थ्य कर्मी का अवकाश स्वीकृत होता है, तो जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाएगी ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ता, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रसव के लिए जागरूकता, टीकाकरण अभियान और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति का सीधा असर आम लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर पड़ता है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि अवकाश प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होगा, स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा कम आएगी और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच सकेगा। इससे अस्पतालों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।