1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 15, 2026, 10:44:07 AM
Bihar Police - फ़ोटो REPORTER
पटना: पुलिस की वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं होती, बल्कि कानून, अनुशासन और जनता के भरोसे का प्रतीक होती है। लेकिन अगर थाने में ड्यूटी के दौरान कोई पुलिस अधिकारी सिर्फ लुंगी पहनकर, बिना टी-शर्ट, बिना शर्ट या किसी भी ऊपरी कपड़े के फरियादियों से आवेदन लेने लगे, तो सवाल सिर्फ एक पुलिसकर्मी पर नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर खड़े होते हैं।
राजधानी पटना से सटे अथमलगोला थाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि एक व्यक्ति सिर्फ लुंगी पहने हुए है। उसके शरीर के ऊपरी हिस्से पर न टी-शर्ट है, न शर्ट और न ही कोई अन्य कपड़ा। इसी हालत में वह थाने के भीतर एक फरियादी से आवेदन लेता नजर आ रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह व्यक्ति बिहार पुलिस में तैनात एएसआई अंजनी सिंह बताया जा रहा है, जिनकी ड्यूटी वर्तमान में अथमलगोला थाना में है।
अब सवाल यह है कि क्या थाने का अनुशासन भी अब "घर जैसा माहौल" बन गया है? अगर जनता अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे और वहां ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारी वर्दी की जगह सिर्फ लुंगी में मिले, तो पुलिस की पेशेवर छवि पर क्या असर पड़ेगा?
इस वायरल वीडियो को लेकर जब अथमलगोला थाना से बातचीत की गई तो पहले कहा गया कि उन्हें वीडियो की विशेष जानकारी नहीं है। लेकिन बाद में थाना की ओर से यह भी कहा गया कि "अगर वीडियो वायरल हुआ है तो उसमें गलत क्या है?" इसके बाद जब रिपोर्टर ने पूछा कि ड्यूटी के दौरान एक पुलिसकर्मी का इस तरह बिना ऊपरी कपड़ों के थाने में मौजूद रहना क्या उचित है, तो सफाई दी गई कि थाना परिसर में आवासीय व्यवस्था भी है, इसलिए अगर कोई इस अवस्था में बाहर आ जाए तो इसमें क्या गलत है।
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। थाना परिसर में सरकारी आवास होना अलग बात है, लेकिन जब कोई पुलिस अधिकारी फरियादी से आवेदन ले रहा हो, तब वह निजी जीवन नहीं बल्कि सरकारी ड्यूटी निभा रहा होता है। ऐसे समय न्यूनतम ड्रेस कोड, शालीनता और अनुशासन का पालन अपेक्षित होता है। क्या कोई सरकारी कार्यालय का कर्मचारी सिर्फ लुंगी पहनकर, बिना शर्ट या टी-शर्ट के आम लोगों का काम करेगा? अगर जवाब "नहीं" है, तो फिर पुलिस थाने में ऐसा कैसे स्वीकार्य हो सकता है?
इस पूरे मामले में ग्रामीण एसपी ने इसे गंभीर माना है। उन्होंने कहा कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा। यानी विभाग भी पहली नजर में इसे सामान्य घटना नहीं मान रहा है।
इस बीच, मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। राजद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार और पुलिस व्यवस्था पर हमला बोला। पोस्ट में बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए और सरकार की जवाबदेही पर भी निशाना साधा गया। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्ष की अपनी प्रतिक्रिया हो सकती है। राजद ने लिखा है कि= "अथमलगोला थाना में अंजनी कुमार सिंह महिला फरियादी के सामने! Bihar Police नीतीश कुमार के समय भी कोई व्यवस्थित, तत्पर या ईमानदार पुलिस बल नहीं थी, पर सम्राट चौधरी के गृहमंत्री बनते ही बिहार पुलिस के कर्मी बिल्कुल आपे से बाहर हो चुके हैं! पूरी तरह से निरंकुश, भ्रष्ट, असभ्य, अभद्र, बेईमान..हो चुकी है पुलिस बल! जब गृहमंत्री सह मुख्यमंत्री ऐसा नमूना हो, तो नीचे के अधिकारी, कर्मी कैसे होंगे? "
लेकिन राजनीति से अलग हटकर देखें तो वायरल वीडियो ने एक गंभीर बहस छेड़ दी है। सवाल यह नहीं है कि पुलिसकर्मी थाना परिसर के सरकारी आवास में किस वेशभूषा में रहता है। सवाल यह है कि क्या उसी अवस्था में फरियादियों से मिलना और सरकारी काम करना पुलिस की गरिमा के अनुरूप है?
बिहार पुलिस लगातार कानून-व्यवस्था सुधारने और जनता का भरोसा जीतने की बात करती है। लेकिन भरोसा सिर्फ अपराधियों की गिरफ्तारी से नहीं बनता, बल्कि पुलिस के व्यवहार, अनुशासन और पेशेवर आचरण से भी बनता है। एक वायरल वीडियो पूरे विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर देता है। अब निगाह इस बात पर है कि कार्रवाई सिर्फ निलंबन तक सीमित रहती है या फिर विभाग यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि वर्दी सिर्फ पहनने की औपचारिकता नहीं, बल्कि पुलिस सेवा की गरिमा और जिम्मेदारी का प्रतीक है।