1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 15, 2026, 10:13:38 AM
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पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक तस्वीर ने नए राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है। औरंगाबाद से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लोकसभा सांसद अभय कुशवाहा की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री को सीएम आवास पर नमस्कार करते अभय कुशवाहा की तस्वीर सामने आने के बाद विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट मानने के बजाय इसके पीछे संभावित राजनीतिक संदेश तलाश रहे हैं।
दिल्ली की राजनीति में हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और सांसदों को लेकर सामने आई चर्चाओं के बाद अब बिहार में भी ऐसे ही राजनीतिक समीकरण बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में किसी भी दल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और न ही अभय कुशवाहा ने किसी राजनीतिक बदलाव का संकेत दिया है। ऐसे में फिलहाल यह पूरी तरह राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों तक ही सीमित है।
अभय कुशवाहा का राजनीतिक सफर लगातार बदलावों से भरा रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का बड़ा हिस्सा जनता दल यूनाइटेड (JDU) के साथ बिताया। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने जेडीयू छोड़कर आरजेडी का दामन थाम लिया। इसके बाद पार्टी ने उन्हें औरंगाबाद लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और वे चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। ऐसे में अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनकी मुलाकात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ औपचारिक मुलाकात थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है।
अभय कुशवाहा पहले भी अपने राजनीतिक फैसलों से चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने गया जिले की टिकारी विधानसभा सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू युवा प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था।
2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने उन्हें बेलागंज सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने आरजेडी का दामन थाम लिया और सांसद बनने में सफल रहे।राजनीति में आने से पहले अभय कुशवाहा गया जिले के कुजापी गांव के मुखिया भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे बिहार के बड़े प्लाई और ईंट कारोबारियों में भी गिने जाते हैं।
दिल्ली की राजनीति में हाल के समय में आम आदमी पार्टी को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। कई मौकों पर AAP के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के दूसरी पार्टियों के संपर्क में होने या दल बदल की अटकलें सुर्खियों में रहीं। इन्हीं घटनाओं की पृष्ठभूमि में अब बिहार में भी अभय कुशवाहा की मुलाकात को जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, अभी तक ऐसा कोई ठोस संकेत सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि बिहार में किसी प्रकार का राजनीतिक ऑपरेशन या दल-बदल की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राजनीतिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि किसी एक मुलाकात के आधार पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अभय कुशवाहा की मुलाकात के बाद आरजेडी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि अभय कुशवाहा की ओर से कोई नया बयान आता है या उनकी राजनीतिक गतिविधियों में बदलाव दिखाई देता है, तभी इस मुलाकात के वास्तविक मायने स्पष्ट हो पाएंगे।
फिलहाल बिहार में आरजेडी के पास लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल सात सांसद हैं। इनमें लोकसभा में चार सांसद और राज्यसभा में तीन सांसद शामिल हैं। लोकसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व पाटलिपुत्र से मीसा भारती, औरंगाबाद से अभय कुशवाहा, बक्सर से सुधाकर सिंह और जहानाबाद से सुरेंद्र प्रसाद यादव कर रहे हैं। वहीं राज्यसभा में मनोज झा, संजय यादव और डॉ. फैयाज अहमद पार्टी के सांसद हैं।
ऐसे में यदि भविष्य में किसी भी सांसद के राजनीतिक रुख में बदलाव होता है तो उसका असर राज्य की राजनीति पर जरूर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल अभय कुशवाहा की मुख्यमंत्री से मुलाकात को लेकर केवल राजनीतिक चर्चाएं हैं। किसी भी दल या नेता की ओर से दल-बदल अथवा नए राजनीतिक समीकरण को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए आने वाले दिनों की राजनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजर बनी हुई है।