Shivratri 2025: हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर, जिसे "छोटी काशी" के नाम से जाना जाता है, अपने ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि है, जिसकी तैयारियां 2025 के लिए जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। यह पर्व मंडी की विशिष्ट पहचान है, जहां हर साल देवताओं का भव्य कुंभ सजता है। 26 और 27 फरवरी को शिवरात्रि मनाया जा रहा है।
मंडी शिवरात्रि: अनोखी परंपरा और अंतरराष्ट्रीय पहचान
मंडी की शिवरात्रि न केवल हिमाचल प्रदेश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए मशहूर है। इस पर्व की खास बात यह है कि इसमें 300 से अधिक देवी-देवता शामिल होते हैं। ये सभी देवी-देवता अपने-अपने "लोग" (ध्वज या प्रतीक चिन्ह) के साथ इस सात दिवसीय मेले का हिस्सा बनते हैं। यह परंपरा राजवंश के समय से चली आ रही है और आज भी इसे पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ निभाया जाता है।
2025 के आयोजन की योजनाएं
आगामी शिवरात्रि महोत्सव के लिए प्रशासन ने जिलेभर के 300 देवी-देवताओं को आमंत्रित करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही, जनरल हाउस का आयोजन भी जल्द होगा, जिसमें स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर इस ऐतिहासिक पर्व को और भव्य और व्यवस्थित बनाने की रणनीति तय की जाएगी।
आकर्षण का केंद्र: राजा और देवी-देवताओं का स्वागत
मंडी के स्थानीय निवासी आकाश शर्मा ने बताया कि इस बार जनरल हाउस में चर्चा होगी कि जब देवी-देवता मंडी के राजा कृष्ण रूप माधव राय से मिलने राजमहल पहुंचते हैं, तो उनके स्वागत के लिए ग्रीन कार्पेट और पड्डल मैदान में बैठने की उचित व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। इस आयोजन को और भी भव्य और आकर्षक बनाने के लिए प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर प्रयास करेंगे।
मंडी शिवरात्रि की अद्वितीयता
यह ऐतिहासिक पर्व न केवल श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है, बल्कि मंडी की संस्कृति और परंपराओं का भी अद्भुत प्रदर्शन करता है। शिवरात्रि में सजने वाला देव कुंभ मंडी को "छोटी काशी" की उपाधि देता है और इसे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाता है।
2025 की महाशिवरात्रि मंडी की इस समृद्ध परंपरा को और भी गौरवपूर्ण बनाएगी। स्थानीय प्रशासन और नागरिक इस ऐतिहासिक आयोजन को यादगार बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।





