Ram Navami: आज रामनवमी के पावन अवसर पर बांका शहर एक ऐतिहासिक और भव्य शोभायात्रा का साक्षी बनेगा। इस भव्य आयोजन का नेतृत्व करेंगी हिंदू समाज की प्रखर वक्ता और साध्वी के रूप में जानी जाने वाली हिंदू शेरनी साध्वी सरस्वती। शोभायात्रा की शुरुआत बांका शहर के मिलिट्री ग्राउंड से दोपहर दो बजे होगी। इस आयोजन को लेकर पूरे जिले में उत्साह का माहौल है और हजारों की संख्या में श्रद्धालु इसमें हिस्सा लेंगे।
धर्मसभा से होगी शुरुआत
इस शोभायात्रा से पूर्व मिलिट्री ग्राउंड में एक विशेष धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें साध्वी सरस्वती दोपहर एक बजे से संबोधन देंगी। धर्मसभा लगभग 30 मिनट तक चलेगी, जिसमें रामनवमी के पौराणिक महत्व और सनातन संस्कृति की रक्षा को लेकर विचार व्यक्त किए जाएंगे। धर्मरक्षक संगठन से जुड़े प्रमुख कार्यकर्ता सह अधिवक्ता मनीष कुमार ने जानकारी दी कि इस आयोजन की तैयारियां पिछले तीन महीनों से युद्धस्तर पर चल रही थीं।
शोभायात्रा में दिखेगा परंपरा और पराक्रम का संगम
इस भव्य शोभायात्रा में जहां एक ओर घोड़े और हाथी शोभा बढ़ाएंगे, वहीं दूसरी ओर युवतियां पारंपरिक परिधान में शस्त्रों का प्रदर्शन करेंगी, जो महिला सशक्तिकरण और परंपरा की रक्षा का प्रतीक होगा। शोभायात्रा में सबसे आगे गुरूधाम के पंडित मंत्रोच्चार और शंखनाद करते हुए चलेंगे, जो वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा।
आदिवासी संस्कृति का होगा विशेष प्रदर्शन
शोभायात्रा की एक और खास विशेषता होगी आदिवासी समुदाय की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य, जो न केवल सांस्कृतिक विविधता को दर्शाएगा, बल्कि रामनवमी के उल्लास को और भी भव्य बनाएगा। इनके नृत्य के साथ शंखनाद और ढोल-नगाड़ों की गूंज माहौल को दिव्यता से भर देगी।
रथ यात्रा से होगा नगर भ्रमण
साध्वी सरस्वती विशेष रूप से सजाए गए रथ पर सवार होकर पूरे बांका नगर का भ्रमण करेंगी। यह रथ नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गुजरेगा और जगह-जगह पर श्रद्धालु उनका स्वागत करेंगे। शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
ऐतिहासिक आयोजन की उम्मीद
धर्मरक्षक संगठन के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पहली बार है जब बांका में इतनी भव्यता और संगठनात्मक स्तर पर रामनवमी मनाई जा रही है। पूरे जिले भर से राम भक्तों का आगमन हो रहा है और स्थानीय प्रशासन भी शोभायात्रा को लेकर सतर्क है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार का भी माध्यम बनेगा। बांका वासियों के लिए यह रामनवमी लंबे समय तक स्मरणीय रहेगी।




