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Kharmas 2025: शुभ-मांगलिक कार्यों पर लगी रोक, आज से शुरू हुआ खरमास; जानें इस मास में किए जा सकते हैं कौन-से कार्य?

Kharmas 2025: आज से खरमास की शुरुआत हो रही है, जिसके साथ हिंदू धर्म में सभी शुभ-मांगलिक कार्यों पर लगभग डेढ़ महीने तक रोक लग जाएगी। इस बार खास बात यह है कि 8 साल के बाद खरमास के दौरान शुक्र ग्रह का अस्त होना होने वाला है, जिससे शादी-ब्याह...।

Kharmas 2025
खरमास 2025
PRIYA DWIVEDI
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Kharmas 2025: आज से खरमास की शुरुआत हो रही है, जिसके साथ हिंदू धर्म में सभी शुभ-मांगलिक कार्यों पर लगभग डेढ़ महीने तक रोक लग जाएगी। इस बार खास बात यह है कि 8 साल के बाद खरमास के दौरान शुक्र ग्रह का अस्त होना होने वाला है, जिससे शादी-ब्याह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य सिर्फ सूर्य के मकर राशि में गोचर के बाद ही शुरू होंगे।


ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने पंचांगों के अनुसार बताया कि आज दोपहर 01:24 बजे सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे खरमास प्रारंभ होगा। यह अवधि लगभग एक महीने की होगी और 14 जनवरी 2026 की रात्रि 09:19 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तब खरमास समाप्त होगा और शुभ कार्यों की अनुमति मिलेगी।


खरमास के दौरान मौसम और ऋतु परिवर्तन

सूर्य के धनु राशि में गोचर के दौरान दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं। इस समय हेमंत ऋतु रहती है और बादल, धुंध, बारिश और बर्फबारी की संभावना रहती है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उत्तरायण प्रारंभ होता है, दिन बड़े होने लगते हैं और मौसम में बदलाव आता है। सूर्य का राशि परिवर्तन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि मौसम और कृषि गतिविधियों पर भी प्रभाव डालता है।


खरमास में किए जाने वाले कार्य

खरमास के दौरान शादी, गृहप्रवेश, नया व्यवसाय आदि जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। लेकिन इस दौरान व्यक्ति दान-पुण्य, भागवत कथा, ग्रंथों का पाठ, मंत्र जाप, रामायण पाठ और प्रसूति स्नान जैसे धार्मिक कार्य कर सकते हैं। पंडित राकेश झा ने बताया कि सूर्य का गुरु की राशि धनु में गोचर करने पर यह अवधि शुरू होती है और मकर राशि में प्रवेश पर समाप्त होती है।


खरमास की पौराणिक कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान सूर्यदेव अपने सात घोड़ों के रथ पर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। घोड़ों के थकने पर सूर्यदेव ने रथ के दो गधों से खींचने की व्यवस्था की और इस कारण रथ की गति धीमी हो गई। इसी वजह से एक मास के लिए खरमास की अवधि निर्धारित हुई।


वर्ष में दो बार होता है खरमास

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्ष में दो बार खरमास लगता है – पहला धनु मास में और दूसरा मीन मास में। इसका कारण यह है कि जब सूर्य गुरु की राशियों (धनु और मीन) में प्रवेश करता है, तो बृहस्पति निस्तेज हो जाता है और विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। वहीं, शादी और विवाह के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना आवश्यक है। सूर्य मकर राशि में प्रवेश करने के बाद ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।


सूर्य का राशि परिवर्तन समय

सूर्य धनु राशि में प्रवेश: मंगलवार 16 दिसंबर 2025, दोपहर 01:24 बजे

धनु राशि में स्थिति की अवधि: लगभग एक मास

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: 14 जनवरी 2026, रात्रि 09:19 बजे

इस प्रकार, इस वर्ष का खरमास धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसका पालन कर लोग शुभ कार्यों में देरी और दैवीय नियमों का सम्मान सुनिश्चित कर सकते हैं।

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रिपोर्टर / लेखक

PRIYA DWIVEDI

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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