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25 जुलाई से उत्तर प्रदेश में निकलेगी 101 दिन की ‘निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा’, मुकेश सहनी का एलान

Mukesh Sahani: मुकेश सहनी ने 25 जुलाई से उत्तर प्रदेश में 101 दिनों की ‘निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा’ निकालने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि 2027 से पहले निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिलने पर BJP का समर्थन नहीं करने का संकल्प दिलाया जाएगा।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 14, 2026, 5:23:40 PM

Mukesh Sahani

- फ़ोटो Reporter

Mukesh Sahani: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक एवं बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित होटल सीपीएस कास्टल क्लब, सिविल लाइन में आयोजित उत्तर प्रदेश संवाद एवं रात्रि प्रवास कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में निषाद समाज के आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। 


उन्होंने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों से वे उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को जागरूक करने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने का कार्य कर रहे हैं। इसी आंदोलन का परिणाम है कि आज निषाद समाज का प्रतिनिधित्व सरकार में दिखाई देता है।


 'सन ऑफ मल्लाह' के नाम से चर्चित मुकेश सहनी ने घोषणा की कि आगामी 25 जुलाई से पूरे उत्तर प्रदेश में 101 दिनों की ‘निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा’ निकाली जाएगी। इस यात्रा के दौरान गांव-गांव, टोले-मोहल्लों और सड़कों पर निषाद समाज के लोगों को गंगाजल देकर संकल्प दिलाया जाएगा कि यदि वर्ष 2027 से पहले केंद्र और राज्य सरकार निषाद समाज को आरक्षण नहीं देती है, तो समाज भाजपा का समर्थन नहीं करेगा। 


उन्होंने कहा कि इन संकल्पों के वीडियो तैयार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित देश के प्रमुख नेताओं को भेजे जाएंगे।


सहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें समाज के आरक्षण के लिए निर्णायक संघर्ष करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. संजय निषाद को छह महीने का समय दिया गया है। यदि वे इस अवधि में केंद्र और राज्य सरकार से निषाद समाज के लिए आरक्षण सुनिश्चित करा देते हैं तो उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा। लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो उन्हें मंत्री पद छोड़कर समाज के हित में खुलकर संघर्ष करना चाहिए।


बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में निषाद समाज की आबादी और मतदान क्षमता राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए खड़ा हो जाए तो प्रदेश की राजनीति की दिशा बदल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यदि इंडिया गठबंधन की सरकार बनती है तो निषाद समाज को उसकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी दिलाने के लिए वे संघर्ष जारी रखेंगे।


उन्होंने कहा कि वीआईपी की यह मुहिम केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई है। आने वाले दिनों में पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर निषाद समाज को एकजुट किया जाएगा और आरक्षण की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।