1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 13, 2026, 1:34:54 PM
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टीवी की दुनिया में हर हफ्ते आने वाली TRP रिपोर्ट ही तय करती है कि कौन सा शो हिट है और कौन फ्लॉप। करोड़ों दर्शकों की पसंद को मापने वाली यह प्रक्रिया जितनी आसान दिखती है, असल में उतनी ही तकनीकी और दिलचस्प होती है।
क्या है TRP और क्यों है अहम
TRP यानी टेलीविजन रेटिंग पॉइंट एक ऐसा पैमाना है जिससे यह पता चलता है कि किसी खास समय पर कितने लोग कौन सा टीवी शो देख रहे हैं। भारत में यह जिम्मेदारी Broadcast Audience Research Council India के पास है, जो हर हफ्ते टीवी दर्शकों का डेटा जारी करता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर शो की लोकप्रियता तय होती है।
BAR-O-Meter क्या होता है?
TRP मापने के लिए BAR-O-Meter नाम की एक खास डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, जिसे चुनिंदा घरों में टीवी से जोड़ा जाता है। इसका काम यह रिकॉर्ड करना होता है कि टीवी पर कौन सा चैनल कितनी देर तक देखा जा रहा है।
क्या होते हैं पैनल होम?
देश के हर घर में यह डिवाइस लगाना संभव नहीं है, इसलिए कुछ चुनिंदा घरों को चुना जाता है। इन्हें “पैनल होम” कहा जाता है। भारत में करीब 50 से 60 हजार ऐसे घर हैं, जहां BAR-O-Meter लगा होता है। इन घरों को इस तरह चुना जाता है कि वे पूरे देश की आबादी का सही प्रतिनिधित्व कर सकें—जैसे शहर, गांव, अलग-अलग वर्ग और उम्र के लोग।
वाटरमार्क टेक्नोलॉजी कैसे करती है काम
हर टीवी चैनल और शो के अंदर एक खास तरह का छुपा हुआ कोड डाला जाता है, जिसे वाटरमार्क कहते हैं। यह कोड दर्शकों को दिखाई या सुनाई नहीं देता, लेकिन BAR-O-Meter इसे पहचान लेता है। जैसे ही टीवी चालू होता है, यह डिवाइस उस कोड को पकड़कर पहचान लेता है कि कौन सा शो देखा जा रहा है।
हर सेकंड का रखा जाता है रिकॉर्ड
BAR-O-Meter हर सेकंड का डेटा रिकॉर्ड करता है—कब टीवी ऑन हुआ, कौन सा चैनल देखा गया, कितनी देर देखा गया और कब बदला गया। यह पूरा डेटा सीधे सर्वर पर भेजा जाता है, जहां इसका विश्लेषण किया जाता है।
कैसे बनती है TRP रिपोर्ट
पैनल होम से मिले डेटा को इकट्ठा कर Broadcast Audience Research Council India विश्लेषण करता है और हर हफ्ते रिपोर्ट जारी करता है। इसी रिपोर्ट से पता चलता है कि कौन सा शो टॉप पर है और किसकी लोकप्रियता घट रही है।
TRP का टीवी इंडस्ट्री पर असर
जिस शो की TRP ज्यादा होती है, उसे ज्यादा विज्ञापन मिलते हैं और उसकी कमाई बढ़ती है। वहीं कम TRP वाले शोज पर खतरा मंडराने लगता है। कई बार खराब रेटिंग के कारण शो को बंद भी करना पड़ जाता है।
इस तरह, कुछ हजार घरों के डेटा के जरिए पूरे देश के करोड़ों दर्शकों की पसंद का अंदाजा लगाया जाता है और उसी के आधार पर तय होती है टीवी की दुनिया की असली रैंकिंग।