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बिहार में साइबर ठगी का चौंकाने वाला खुलासा… कम पढ़े-लिखे ठगों के निशाने पर प्रोफेसर-डॉक्टर, करोड़ों की ठगी से हड़कंप

Cyber Crime: बिहार की राजधानी पटना में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। ठग अब “डिजिटल अरेस्ट” और फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए डॉक्टर, प्रोफेसर और छात्रों तक को अपना शिकार बना रहे हैं, जिससे पूरे शहर में...

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 13, 2026, 2:10:11 PM

बिहार में साइबर ठगी का चौंकाने वाला खुलासा… कम पढ़े-लिखे ठगों के निशाने पर प्रोफेसर-डॉक्टर, करोड़ों की ठगी से हड़कंप

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Cyber Crime In Bihar: बिहार की राजधानी पटना में साइबर ठगी का जाल तेजी से फैलता जा रहा है और अब इसके तरीके भी बेहद चौंकाने वाले सामने आ रहे हैं। कम पढ़े-लिखे ठग, जिनकी शिक्षा मैट्रिक या 10-11वीं तक सीमित है, अब उच्च शिक्षित वर्ग को अपना निशाना बना रहे हैं। डॉक्टर, प्रोफेसर, बड़े कारोबारी और यहां तक कि आईआईटी के छात्र भी इनके जाल में फंस रहे हैं।


हर महीने सैकड़ों लोग बन रहे शिकार

साइबर पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पटना में हर महीने औसतन करीब 206 लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। वर्ष 2025 में साइबर ठगी के कुल 2602 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि इस साल जनवरी और फरवरी में ही 284 केस सामने आ चुके हैं। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि शहर में साइबर अपराध किस तेजी से पैर पसार रहा है।


डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर ठगी

ठगों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ये खुद को कभी सीबीआई अधिकारी तो कभी मुंबई पुलिस का अफसर बताकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाते हैं। कई मामलों में लोगों को यह विश्वास दिला दिया जाता है कि वे किसी गंभीर अपराध में फंस गए हैं, और फिर उनसे मोटी रकम ऐंठ ली जाती है। इसके अलावा शेयर मार्केट में निवेश, क्रिप्टोकरेंसी और फर्जी ऐप (APK फाइल) के जरिए भी लोगों को फंसाया जा रहा है।


प्रोफेसर से करोड़ों की ठगी ने उड़ाए होश

हाल ही में सामने आए एक मामले ने सबको चौंका दिया, जब पटना यूनिवर्सिटी की एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर साइबर ठगों ने 3.07 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। इस घटना के बाद साइबर अपराधियों के हौसले और उनके नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।


कम पढ़ाई, लेकिन कमाल का कम्युनिकेशन

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ठगी करने वाले अधिकतर अपराधी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए कई ठग सिर्फ मैट्रिक या 11वीं तक पढ़े हुए हैं। इसके बावजूद उनके कम्युनिकेशन स्किल इतने प्रभावशाली होते हैं कि वे डॉक्टरों और प्रोफेसरों जैसे शिक्षित लोगों को भी आसानी से अपने जाल में फंसा लेते हैं। ये ठग हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में धाराप्रवाह बातचीत करते हैं, जिससे सामने वाला व्यक्ति उन पर जल्दी भरोसा कर लेता है।


पटना में फैलता जा रहा नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर ठगों का नेटवर्क पटना में तेजी से फैल रहा है। नालंदा, नवादा, शेखपुरा और जमुई जैसे जिलों से आए अपराधी पटना में किराए के मकानों और फ्लैटों में रहकर अपने गिरोह चला रहे हैं। खासकर दक्षिणी पटना के रामकृष्ण नगर, पत्रकार नगर और बेऊर इलाके इनका मुख्य ठिकाना बनते जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में करीब 80 प्रतिशत गिरफ्तारियां इन्हीं क्षेत्रों से हुई हैं।


सोशल मीडिया से सीख रहे ठगी के नए तरीके

साइबर पुलिस के अनुसार, इन ठगों में अधिकतर किशोर और युवा शामिल हैं, जो सोशल मीडिया के जरिए ठगी के तरीके सीखते हैं। YouTube और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध वीडियो और चैनलों से ये साइबर फ्रॉड के नए-नए तरीके सीख रहे हैं। इसके बाद आईटी पेशेवरों की मदद से सॉफ्टवेयर तैयार कर ठगी को अंजाम दिया जाता है।


लगातार कार्रवाई, फिर भी चुनौती बरकरार

पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पिछले साल 139 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि इस साल अब तक 35 ठगों को पकड़ा जा चुका है। इसके बावजूद साइबर ठगी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जिससे आम लोगों के साथ-साथ शिक्षित वर्ग भी चिंता में है।